तिरुपति में लोकसभा के उपचुनाव के पहले बीजेपी और जनसेना के बीच कैंडीडेट उतारने के लिए घमासान जारी

janasena and bjp seeks filed candidate tirupati bypoll - Sakshi Samachar

विशाखा कोर कमिटी ने तय किया भाजपा उम्मीदवार 

रथयात्रा के माध्यम से बीजेपी कर रही नफरत भड़काने की साजिश

जनसेना अपने दम पर मैदान में उतरने की कवायद में जुटी 

अमरावती : राज्य के तिरुपति में लोकसभा संसदीय सीट के उपचुनाव (Tirupati Bypoll) की तैयारी हर पार्टी अपनी तरह से कर रही है, वहीं विपक्ष में उम्मीदवारों के चयन को लेकर कई तरह के विवाद देखे जा रहे हैं। वहीं उम्मीदवार की पसंद को लेकर भी सहयोगी दलों के बीच विवाद बढ़ रहा है। बाहर भले ही ये लोग एक दिखाई दे रहे हैं, साथ नजर आ रहे हैं पर अंदर हालत एक-दूसरे पर तलवारें निकलने जैसी है। बीजेपी (BJP) नेताओं द्वारा तिरुपति उपचुनाव पर की गई टिप्पणी से जनसेना (Janasena) की भौंहे चढ़ गई है। अब तक जहां जनसेना के नेता कह रहे थे कि उपचुनाव में किसे उम्मीदवार बनाया जाए इसका निर्णय एक समिति लेगी वहीं अब जनसेना के नेता बीजेपी के व्यवहार को देखकर अकेले फैसला लेने के मूड में दिख रही है। 

दो दिन पहले दग्गुबाटी पुरंदेश्वरी (Daggubati Purandeshwari) के घर पर आयोजित भाजपा कोर कमेटी की बैठक ने सहयोगियों को दूर रखने का फैसला किया। जनसेना नेताओं को इस मामले के बारे में पता चला कि ये सहयोगी दलों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि गठबंधन करने की तुलना में अपने दम पर चुनाव के मैदान में प्रवेश करना बेहतर है। माना जा रहा है कि जनसेना 21 मई को तिरुपति में होने वाली एक अहम बैठक में इस मामले की घोषणा करेगी।

रथ यात्रा का लक्ष्य केवल उपचुनाव है

कोर कमेटी ने फैसला किया कि बीजेपी नेताओं को तिरुपति उपचुनाव के लिए रथ यात्रा करनी चाहिए। यह पता चला है कि पुलिस ने राज्य में मंदिरों के खिलाफ बीजेपी और टीडीपी की रंजिश को उजागर किया है। पर बीजेपी ने उनकी उपेक्षा की और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने का फैसला किया और अब वे कपिल तीर्थ से राम तीर्थ तक रथ यात्रा शुरू करने की योजना बना रहे हैं। 

4 फरवरी को तिरुपति कपिलतीर्थ से शुरू होने वाली आठ दिवसीय यात्रा में पीठापुरम, अंतर्वेदी, विजयवाड़ा, नेल्लूर और श्रीशैलम में कार्यक्रम आयोजित करने का निश्चय किया गया है। यह माना जा रहा है कि बीजेपी इस रथ यात्रा में लोगों की धार्मिक भावना को उकसाने के उद्देश्य से आगे बढ़ेगी जिससे कि तिरुपति उपचुनाव में इसका लाभ मिल सके। 

जहां बीजेपी उपचुनाव के लिए ऐसी तैयारी करने में लगी है वहीं विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि जनसेना के नेता तिरुपति के उपचुनाव में बीजेपी की अकेले इस तरह की व्यूह रचना को अपना अपमान रहे हैं और समय आनेपर बीजेपी को उचित सबक सिखाने की तैयारी में लगे हैं। अब दोनों के बीच का विवाद दिखने भी लगा है। 

बीजेपी का उम्मीदवार ही लड़ेगा चुनाव

पहले यह माना जा रहा था कि जनसेना और बीजेपी तिरुपति में संयुक्त उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे लेकिन बीजेपी नेताओं ने अंदर ही अंदर आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार के चयन करने की खबर है। पार्टी की कोर कमेटी ने तिरुपति संसदीय उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के लिए काम करने के लिए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है।

इसके तहत तिरुपति के प्रत्येक क्षेत्र में एक टीम भेजने और महत्वपूर्ण लोगों को इसके नेतृत्व की जिम्मेदारियां सौंपने का फैसला किया है। चुनाव खत्म होने तक सबको तिरुपति में रहने का हुक्म जारी किया गया है। बीजेपी द्वारा किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए ऐसा लगता है कि अगला कदम पार्टी के उम्मीदवार की घोषणा करना ही है।

विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि उम्मीदवार अधिसूचना के आने और फील्ड स्तर तक सबके पहुंचने के पहले इस बात का खुलासा नहीं किया जाएगा कि उम्मीदवार कौन है। 
वहीं यह प्रचार भी चल रहा है कि बीजेपी नेता जनसेना प्रमुख पवन कल्याण से आने वाले दबाव का सामना करने में सक्षम नहीं हैं।

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यह स्पष्ट है कि बीजेपी नेताओं ने पहले ही तय कर लिया है कि किसी भी परिस्थिति में जनसेना को तिरुपति उपचुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया जाएगा। पार्टी इस बात पर भी बहस कर रही है कि क्या रावेला किशोर बाबू के बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की संभावना है। 

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