कोविड-19 : आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 95 फीसदी रिकवरी रेट दर्ज

Highest Recovery Rate Recorded in Andhra Pradesh - Sakshi Samachar

आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा रिकवरी रेट 95 फीसदी दर्ज

आंध्र प्रदेश देश का रिकवरी में पहला राज्य बन गया है

अमरावती : आंध्र प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस की जंग में मख्य पड़ाव पार कर लिया है। प्रदेश में बुधवार को अब तक का सबसे ज्यादा रिकवरी रेट 95 फीसदी दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने मई के बाद इस तरह की सफलता अपने नाम कर ली है। 

इससे पहले केरल में भी हालात बेहतर होते देखे गए थे, मगर वहां अचानक मामले तेजी से बढ़ते गये। इसके कारण केरल पहला मुकाम हासिल करने से चूक गया। यह सब मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की दूरगामी सोच से संभव हो पाया है।

कुछ जगहों पर 98 फीसदी रिकवरी दर

आंकड़ों के मुताबिक अब तक एपी में 7.93 लाख लोग कोरोना की चपेट में आ गये हैं। राज्य में बुधवार को इन्फेक्शन के 3,746 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक सामने आए कुल मामलों में से 7.54 लाख मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। यहां तक कि कर्नूल और नेल्लोर में 98 फीसदी तक रिकवरी रेट पहुंच गया। राज्य के हर जिले में रिकवरी रेट कम से कम 90 फीसदी है।

आंध्र प्रदेश सबसे आगे

विश्लेषकों का मानना है कि आंध्र प्रदेश को मिल रही इस सफलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें बीमारी को सही तरह से मैनेज करना, व्यापक स्तर पर और सटीक तरीके से टेस्टिंग करना, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करना, घर-घर जाकर सर्वे करना, कम्यूनिटी सर्विलांस करना और इलाज और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना शामिल हैं। हालांकि, सबसे बड़ी भूमिका बड़े स्तर पर टेस्टिंग की रही है।

टेस्टिंग की भूमिका अहम

जुलाई महीने में हर दिन आने वाले इन्फेक्शन के मामले बढ़ने के बावजूद जुलाई, अगस्त और सितंबर के बाद भी राज्य में टेस्टिंग पर पूरा जोर दिया गया। इसके चलते देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग करने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश शामिल हो गया। देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तमिल नाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किए जा रहे हैं। हालांकि, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने पॉजिटिविटी रेट बढ़ने के बावजूद 14 दिन के अंदर होने वाली टेस्टिंग कम कर दी है।

खतरा अभी टला नहीं है 

विश्लेषकों का मानना है कि भले ही रिकवरी दर में कमी आई है। मगर अभी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। आशंका जताई गई है कि प्रदेश में इन्फेक्शन के मामले और बढ़ सकते हैं। दरअसल, सरकार ने नवंबर में शिक्षण संस्थान खोलने और कमर्शल ऐक्टिविटी शुरू करने का प्रस्ताव किया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कोरोना मामले बढ़ने के हालात में रोकने की तैयारी कर रहा है। खासकर तब जब कृष्णा जैसे जिलों में पिछले कुछ हफ्तों में इन्फेक्शन के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सर्दियों के साथ-साथ त्योहार का मौसम आने से भी कोरोना इन्फेक्शन के ज्यादा मामले बढ़ने की आशंका है।

सबसे ज्यादा टेस्ट भारत में

इसी क्रम में इस हफ्ते भारत में 10 करोड़ टेस्ट पूरे किए जा सकते हैं। बुधवार तक ही देश में 9.72 करोड़ टेस्ट किए जा चुके हैं। इससे ज्यादा 12.7 करोड़ टेस्ट अब तक सिर्फ अमेरिका में किए गए हैं। दिल्ली में हर दिन 10 लाख लोगों पर 2 लाख टेस्ट, आंध्र में 1.37, तमिलनाडु में 1.2 लाख, केरल में 1.14 लाख, कर्नाटक में एक लाख, बिहार में 78,563, महाराष्ट्र में 67,500, यूपी में 59,764, राजस्थान में 45,611 और पश्चिम बंगाल में 42,088 टेस्टिंग किए जाने की प्रक्रिया जारी हैं।

तेलंगाना में टेस्टिंग कम और रिकवरी दर भी कम

पड़ोसी राज्य तेलंगाना में पहले से ही कोरोना टेस्टिंग को लेकर विवादों में रहा है। कोरोना के  मृत्यु  दर और रिकवरी दर को लेकर तेलंगाना उच्चन्यालय में सुनवाई हुई। सरकार के जवाब पर एससी अनेक बार नाराज भी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना अब भी कोरोना टेस्टिंग संतोषजनक नहीं है। हां दर्ज मामलों में कमी आई है। कहां जा रहा है मामले कम दर्ज होने का कारण टेस्टिंग के कम होना है।

 

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