राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन व CM YS जगन ने लोगों की दी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई

Governor Biswabhusan Harichandan  And CM YS Jagan Wishes Krishna Janmashtami - Sakshi Samachar

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की लोगों को बधाई

जन्माष्टमी सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण का पर्व

अमरावती : आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लोगों की बधाई दी है। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के संदर्भ में भगवत गीता के से कृष्ण के संदेश को याद किया।

उन्होंने कहा, "श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण का पर्व है। यह शुभ दिन समाज में शांति, मित्रता, भाईचारा और लोक कल्याण की स्थापना का प्रतीक है।"

उन्होंने आगे कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरे देश में खुशी और उत्साह के साथ मनाई जाये। साथ ही राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सभी लोगों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना व्यक्त की है।

यह भी पढ़ें :

जन्माष्टमी पर करें इन 5 में से कोई एक उपाय, मिलेगी सुख, संपदा और समृद्धि

ज्ञातव्य है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।  इस बार कृष्ण जन्म की तारीख और नक्षत्र एक साथ नहीं मेल खा रहे हैं। जिसके बाद लोगों को कन्फ्यूजन हो रहा था कि जन्मोत्सव कब मनाएं। 

दरअसल 11 और 12 अगस्त दोनों दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। बस थोड़ा समझने की जरूरत है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो विचार धाराओं के तहत मनाई जाती है। स्मार्त और वैष्णवों मतावलंबियों के हिसाब से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को मनाया जाता है। दर असल श्रीकृष्ण भक्त दो प्रकार के होते हैं, स्मार्त और वैष्णव। स्मार्त भक्तों में वो लोग आते हैं जो जो गृहस्थ जीवन में रहते हुए  अन्य देवी- देवताओं की भांति पूजन, व्रत करते हैं और श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। 

जबकि  वैष्णवों में वो भक्त होते हैं जो अपना पूरा जीवन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर चुके होते हैं। वैष्णव मत को मानने वाले श्रीकृष्ण की भक्ति ईश्वर को प्राप्त करने के लिए करते हैं।

कब मनाएं जन्माष्टमी ?

आपको बता दें कि 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 07 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र की बात करें तो यह   13 अगस्त को सुबह 03 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगा । 

गृहस्थ 11 अगस्त को मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

स्मार्त भक्तों यानी (गृहस्थ-जन) का मानना है कि जिस दिन तिथि है उसी दिन जन्माष्टमी मनानी चाहिए। स्मार्तों के अनुसार अष्टमी 11 अगस्त को है। इस लिए वो 11 अगस्त को ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। अर्थात मंगलवार को स्मार्त समुदाय के लोग जो शादी शुदा और गृहस्थ है, पारिवारिक जीवन जी रहे हैं वो इस दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। बतादें कि उज्जैन, जगन्नाथ पुरी और काशी में 11 अगस्त को उत्सव मनाया जाएगा।

वैष्णव 12 अगस्त को मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 

जबकि वैष्णव भक्तों का कहना है कि जिस तिथि से सूर्योंदय होता है पूरा दिन वही तिथि होती है। इस अनुसार अष्टमी तिथि में सूर्योदय 12 अगस्त को होगा। मथुरा और द्वारका में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। 

जन्माष्टमी तिथि

अष्टमी तिथि आरम्भ – 11 अगस्त दिन मंगलवार सुबह 09 बजकर 06 मिनट से

अष्टमी तिथि समाप्त – 12 अगस्त दिन बुधवार सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, यही वजह है कि इस पर्व को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन व्रत और पूजन करने से सुख समृद्धि और वैभव और दीघायु संतान की प्राप्ति होती है । 
 

Advertisement
Back to Top