ऐसे थे आंध्र प्रदेश के दिलों में बसने वाले जननेता YS राजशेखर रेड्डी, भूलता नहीं है हंसता हुआ चेहरा

 Dr YSR Birthday Special on His Aniverssary  - Sakshi Samachar

वाईएसआर ने मुस्लिम समुदाय को चार फीसदी आरक्षण दिया

वाईएसआर को लोग आज भी उनके कार्यों के लिए याद करते हैं

डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंटी राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) का जन्म 8 जुलाई 1949 में कड़पा जिले के पुलिवेंदुला में हुआ था। डॉ. राजशेखर रेड्डी  के वाईएसआर नाम से जाने जाते थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य रहे और 2004 से 2009 तक अविभाजित आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। डॉ. राजशेखर रेड्डी को जमीन से जुड़े नेताओं में गिना जाता था, जिन्होंने ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया था।

राजनीतिक कॅरियर

वाईएसआर कडपा संसदीय सीट से नौंवीं, दसवीं, ग्यारवीं और बारहवीं लोकसभा के लिए चार बार लोकसभा सदस्य चुने गए, जबकि जिले की पुलिवेंदुला सीट से 6 बार विधानसभा सदस्य का चुनाव जीत कर विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2003 में पूरे आन्ध्र प्रदेश की एक ऐतिहासिक पदयात्रा की थी और अपनी मेहनत के बल पर 2004 में कांग्रेस को सत्ता में ले आने में सफल रहे।

NT रामाराव के बाद चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में चल रही सत्ता को चुनौती देने में असफल कांग्रेस पार्टी आंध्र प्रदेश में लगातार हारती जा रही थी। इसी समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने वाईएसआर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया और इसके बाद उन्होंने पार्टी में जान फूंकनी शुरू कर दी। मगर साल 1999 में विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस को जीत नहीं दिला सके। हालांकि वाईएसआर एक शक्तिशाली विपक्ष के नेता बनकर सामने आये। इसके बाद जमकर पांच सालों तक नेता विपक्ष के तौर पर जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कांग्रेस की बड़ी जीत के लिए आधार बनाना शुरू कर दिया।

ऐतिहासिक पदयात्रा

कहा जाता है कि चंद्रबाबू के मनमानी व जनविरोधी फैसलों व कार्यों को लेकर 2003 में वाईएसआर ने राज्य में 1400 किलो मीटर से भी अधिक की   पदयात्रा की। पदयात्रा के दौरान वाईएसआर का फोकस किसानों के मुद्दे और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर रहा। वाईएसआर की पदयात्रा कड़ी धूप में जारी रहा करती थी। इस तरह, वाईएसआर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए एक हीरो बन गये और 2004 के चुनाव में भारी बहुमत के साथ कांग्रेस पार्टी को सत्ता में लेकर आने में सफल रहे।

कहा जाता था कि राज्य के हित में पार्टी के सारे फैसले वाईएसआर स्वयं फैसले लेते थे। साल 2004 के चुनाव में वाईएसआर ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस सरकार किसानों को मुफ्त बिजली देगी और उनके ऋण माफ करेगी। अपने इस नारे के दम पर वाईएसआर ने कांग्रेस को न सिर्फ राज्य की सत्ता दिलाने में मदद की बल्कि राज्य से 42 में 29 सांसदों को भी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

इसके बाद कांग्रेस पार्टी में वाईएसआर का कद बढ़ गया और वह धीरे धीरे राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस के लिए बहुत अहम नेता भी बन गये। कांग्रेस के लिए आंध्र प्रदेश से जीतकर आये 29 लोक सभा सांसदों ने केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

जननेता की छवि

वाईएसआर हमेशा गरीबों के कल्याण के बारे में सोचा करते थे और उसे पूरा करने की भरपूर कोशिश किया करते थे। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वाईएसआर जैसे नेता दुनिया में बहुत कम मिलते हैं, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर भी आम जनता का दर्द बहुत आसानी से समझ लिया करते हैं। जो कोई उनसे अपना फरियाद कहता था उसकी भावना को समझते हुए झटपट मदद का भरोसा दे दिया करते थे। कोई भी जरूरतमंद उनके पास से खाली हाथ नहीं गया। उन्होंने जो योजनाओं गरीबों व पिछड़े के कल्याण के लिए सोचींऔर चलायीं, उनको आज भी आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के नेता गिनाया करते हैं और अन्य राज्यों के नेता भी उनको अपनाया करते हैं।

मुस्कुराता हुआ खुशदिल चेहरा

कहते हैं कि अगर आप तेलुगु भाषी राज्यों अर्थात तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों के घरों में जाएंगे और उनके घरों की तस्वीरों को देखेंगे तो अधिकांश घरों में डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी किसी न किसी रूप में जरूर मिल जाएंगे। ऐसा कहा जाता है कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में वाईएसआर की कई हजार प्रतिमाएं गांवों व शहरों में स्थापित की गई हैं। जहां कहीं पर भी उनकी प्रतिमाएं नहीं है वहां पर उनकी अरोग्यश्री, इंदिरम्मा आवास योजना, जलयज्ञम, मुफ्त बिजली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए उनका मुस्कुराता हुआ उनका चेहरा दिखाई देता है।

पेंशन योजना

डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी ने अपनी दूरदर्शी सोच के चलते न केवल बुजुर्गों के पेंशन के बारे में सोचा बल्कि गरीब व कमजोर तबकों के लोगों को बीमारी के दौरान होने वाली तकलीफ को महसूस करते हुए उनके निवारण के लिए स्वास्थ्य संबंधी अनेक योजनाएं शुरू कीं । इनमें सबसे महत्वपूर्ण है आरोग्यश्री योजना। जो लोगों की बीमारी में मददगार साबित हुई और उसकी बदौलत लोगों को अपनी चिकित्सा के लिए कभी घर या जमीन जायदाद बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा। यह बात आज भी दोनों राज्यों के लोग खुले दिल से स्वीकार करते हैं। वाईएसआर ने टीडीपी के शासनकाल में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बदहाली देखकर एक डॉक्टर होने के नाते गरीबी से जूझ रही जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया करने का संकल्प लिया। उन्होंने गरीब परिवारों के लिए आरोग्यश्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की। इस योजना के माध्यम से दो लाख रुपये तक मुफ्त में निजी अस्पतालों में उपचार का लाभ उठा सकते थे।

स्वर्णांध्रा का सपना

राज्य में सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्यभर की लगभग सभी नदियों पर बृहत सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण करने के उद्देश्य से जलयज्ञम कार्यक्रम शुरू किया और उनके शासनकाल में कई सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुईं और लाखों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई जल मिलने लगा। वाईएसआर ने इन्हीं योजनाओं व विकास कार्यक्रमों के बल पर आंध्र प्रदेश को स्वर्णांध्रा बनाने का सापना देखा था, जिसके दम पर यहां के लोगों की गिनती देश के सबसे अग्रणी राज्यों में होने लगती। पर उनकी असामयिक मृत्यु से उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पायी, क्योंकि बाद की सरकारों व मुख्यमंत्रियों ने उनके जैसी सोच के तहत काम नहीं किया।

रोटी, मकान और शिक्षा पर भी जोर

वाईएसआर ने इंदिरम्मा आवास योजना के जरिए लाखों बेघर लोगों के लिए एक निवास स्थान देकर गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर दिया। इतना ही नहीं, 2 रुपये प्रति किलो चावल देने के पीछे लक्ष्य यह था कि कोई भी गरीब भूखा न रहे और किसी की मौत भूख की वजह से न हो।

इतना ही नहीं वाईएसआर चाहते थे कि गरीबी में जीने वाले हर परिवारों के बच्चे भी उच्च शिक्षा हासिल करें। वाईएसआर ने फीस रिअंबर्समेंट के जरिए लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने का सुनहरा मौका दिया और वो इसमें सफल भी हुए। इस योजना के कारण वाईएसआर काफी लोकप्रिय नेता बन गए। वाईएसआर चाहते थे कि प्रदेश का हर नागरिक को रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा अच्छी शिक्षा भी जरूर मिले।

मुस्लिम समुदाय को आरक्षण का लाभ

डॉ वाईएसआर ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति अनुसूचितजनजाति और बीसी समेत समाज के तमाम पिछड़े वर्गों के लिए जो कुछ किया वह बेमिसाल है। वाईएसआर को इसी बात को लेकर प्रदेश के लोग आज भी महसूस करते हैं। यहां पर एक बात याद दिलाना जरूरी है कि तेलंगाना विधानसभा में एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि 'कोई अन्य राजनीतिक नेता नहीं, अकेले वाईएसआर और सिर्फ वाईएसआर थे, जिन्होंने मुस्लिम समुदाय को चार फीसदी आरक्षण दिया था।'

देश के राजनीतिक इतिहास में वाईएसआर अकेले ऐसे नेता रहे हैं जिनके कद व सम्मान के सामने कोई और नेता खड़ा नहीं हो सकता। डॉ वाईएसआर को तेलुगु भाषी लोग आज भी उनके कार्यों के लिए याद करते हैं।

पिता की राह पर बेटा भी

आंध्र प्रदेश का यह सौभाग्य है कि वाईएसआर के बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। वाईएस जगन के एक साल के शासनकाल ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। लोग अब सोच रहे हैं कि चद्रबाबू नायडू जैसे व्यक्ति को इतने सालों तक सत्ता सौंपकर बहुत बड़ी गलती की है। वाईएस जगन पिता की एक बात को बार-बार दोहराते है- ऐसा काम कीजिए, जिसे लोग हमें हमेशा दिल से याद करें।

अनहोनी ने छीन लिया प्यारा नेता

2 सितंबर 2009 को रच्चाबंडा कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाते समय उनका हेलीकॉप्टर नल्लामला के जंगल में खो गया। 3 सितंबर की सुबह कर्नूल से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर रूद्रकोंडा की पहाड़ी पर उनका शव मिला। उनके साथ हेलीकॉप्टर में सवार चार अन्य लोगों की भी मौत हो गई। उनके लापता हेलीकॉप्टर की खोज के लिए भारत का सबसे बड़ा तलाशी अभियान चलाया गया था। उस दिन हुई घटना ने आंध्र प्रदेश के भविष्य के सपनों को चकनाचूर कर दिया।

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