कौन हैं रॉबिन शर्मा, जिन्हें TDP सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने बनाया है अपना राजनीतिक सलाहकार

Chandrababu Appoints Robin Sharma as his Political Advisor - Sakshi Samachar

अमरावती : अपनी कही हुई बातों से मुकरने में माहिर नारा चंद्रबाबू ने एक बार फिर यूटर्न ले लिया है।  YSR Congress Party ने जब आईपैक के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) को अपना राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था तब चंद्रबाबू एंड फैमिली ने जमकर आलोचना की थी। जनसभाओं और संवाददाता सम्मेलनों में चंद्रबाबू यह कहकर वाईसीपी की आलोचना करते थे कि राजनीतिक असमर्थता की वजह से उसने कंसल्टेंट नियुक्त कर लिया है। 

टीडीपी के वरिष्ठ नेता तक ये कहते नहीं थकते थे कि YSRCP चाहे कितने भी पीके लेकर आए, लेकिन वे उन्हें कुछ नहीं कर सकते। उनका कहना था कि चंद्रबाबू राजनीतिक चाणक्य हैं और वे अकेले एक हजार पीके के समान हैं। चंद्रबाबू नायडू भी खुद को देश के सबसे सीनियर नेता और राजनीति में पारंगत बताया करते थे।

यही नहीं, पीके की नियुक्ति का हवाला देते हुए  YSRCP की आलोचना किया करते थे। हालांकि 2019 के चुनाव में चंद्रबाबू की चाणक्या नीति कोई असर नहीं दिखा पाई और तेलुगु देशम पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। आखिर में चंद्रबाबू के बेटे नारा लोकेश तक मंगलगिरी विधानसभा सीट से हार गए।

चुनाव में सत्ता से बेदखल होने के बाद से चंद्रबाबू और उनकी पार्टी की स्थिति बदतर बनी हुई है। इससे पहले कही गई अपनी बातों के खिलाफ जाकर चंद्रबाबू ने अब अपने लिए एक राजनीतिक रणनीतिकार को नियुक्त कर लिया है। बाबू का नया रणनीतिकार वही व्यक्ति है जो पीके की टीम में काम कर चुका है।

2019 के चुनाव से पहले पीके की टीम के सदस्य रहे रॉबिन शर्मा ने बाद में खुद का शोटाइम कंसल्टिंग नाम की एक संस्था स्थापित की है और वह पिछले 6 महीने से तेलुगु देशम पार्टी के  लिए रणनीति तैयार कर रहा है। तिरुपति उपचुनाव के लिए रणनीति बनाने को लेकर रॉबिन शर्मा ने चंद्रबाबू नायडू के साथ समझौता किया है।

बताया जा रहा है कि चंद्रबाबू नायडू  2024 के चुनाव में भी रॉबिन शर्मा को अपना पॉलिटिकल कंसल्टेंट नियुक्त करने को तैयार है। खुद टीडीपी नेता बता रहे हैं कि चंद्रबाबू नायडू लंबे समय से खुद की रणनीति बनाना छोड़कर रॉबिन शर्मा की रणनीतियों पर अमल कर रहे हैं।

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पिछले दिनों चंद्रबाबू का हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के तौर पर क्रिश्चियन समुदाय पर गंभीर आरोप लगाना भी रॉबिन शर्मा की रणनीति का एक हिस्सा था, हालांकि यह स्टंट विफल रहा। नतीजा चाहे कुछ भी हो खुद टीडीपी में यह बातें सुनने को मिल रही है कि चंद्रबाबू नायडू ने कंसल्टेंट नियुक्त करने के जरिए एक बार फिर यू टर्न ले लिया है।
   

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