मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को आंध्र प्रदेश सरकार का तोहफा, घटा दी गयी फीस

AP Government Order For Medical College Fees  - Sakshi Samachar

आंध्र प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की फीस में की गई कमी

अब गरीबों के बच्चे पढ़ पायेंगे डॉक्टर की पढ़ाई

अमरावती : आंध्र प्रदेश सरकार ने मेडिकल एजुकेशन फीस में भारी कमी की है। साल 2020-21 शैक्षणिक वर्ष के लिए स्नाकोत्तर (पीजी) मेडिकल छात्रों के प्रवेश को नजदीक आते देख निजी कॉलजों की फीस में कमी की है। आपको बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी शनिवार को जीत का शनिवार को जश्न मना रही है। 

वाईएस जगन सरकार ने गरीब मेडिकल छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए फीस में कमी करने का फैसला लिया है। पीजी मेडिकल छात्रों की सीटों के साथ पीजी डेंटल छात्रों की फीस में भी कमी की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विशेष प्रधान सचिव डॉ केएस जवाहर रेड्डी ने शुक्रवार को उक्त आशय का आदेश जारी किया है। 

जारी आदेश के अनुसार, पीजी मेडिकल सीटों के साथ पीजी डेंटल सीटों के फीस में भी कमी की गई है। कम की गई फीस कन्वीनर कोटा, प्रबंधन कोटा और  एनआरआई कोटा पर भी लागू होगी।

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सरकार की यह है मंशा

वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार की मंशा है कि केवल धनवान छात्रों तक ही मेडिकल पढ़ाई सीमित न रह पाये। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई करने का अवसर देने की कोशिश की जा रही है। मेडिकल फीस को विभिन्न श्रेणियों में 40 से 50 फीसदी में कमी की गयी है।

सरकार के इस फैसले से निजी मेडिकल कॉलेजों में वसूली जाने वाली एक से डेढ़ करोड़ तक की फीस अब लाखों रुपये तक सिमट जाएगी। इसी तरह कन्वीनर कोटा फीस, जो एक साल के लिए 7.60 लाख रुपये थी, अब आधी हो गई है। 

आदेश के अनुसार, इसके बाद सभी मेडिकल कॉलेजों में एक जैसी फीस वसूली जाएगी। शैक्षणिक वर्ष- 2020-21 से लेकर 2022-23 तक कम की गयी फीस के नियम लागू रहेंगे। वार्षिक फीस को कॉलेज प्रबंधन दो बार वसूल सकते हैं। यदि कोई कॉलेज अधिक फीस लेता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

कॉलेज प्रबंधन कर रहा विरोध

दूसरी ओर फीस नियंत्रण कमेटी (एएफआरसी) ने मेडिकल फीस में कम किये जाने के सरकार के फैसले का विरोध किया है। साथ ही घोषणा की है कि इस साल पीजी मेडिकल छात्रों के प्रवेश को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।

कमेटी ने भी उक्त आशय का पत्र प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा है। कमेटी ने पत्र में कहा है कि कॉलेजों में जारी कार्य और खर्च को देखा बिना ही सरकार ने फीस कम करने का फैसला लिया है। साथ ही कहा कि छात्रों से वसूल किये जाने वाली फीस से भी छात्रों को कॉलेज की ओर से दिये जाने वाला स्टाइपेंड कई गुना अधिक है। सरकार के फैसले के चलते कॉलेज चलाना काफी मुश्किल हो जाएगा।

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