पुण्यतिथि विशेष : ऐसा था NTR व्यक्तित्व, ऐसे पाई फिल्म व राजनीति में शानदार सफलता

दिवंगत एनटीआर - Sakshi Samachar

आज दिवंगत नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) की 23वीं पुण्यतिथि है। फिल्मी अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रह चुके एनटीआर ने कांग्रेस के आधिपत्य दूर करने के लिए वर्ष 1982 में तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की। एनटी रामा राव ने जब राजनीतिक पारी की शुरूआत की उस समय वे एक लोकप्रिय अभिनेता थे। पार्टी स्थापना के केवल नौ महीने में चुनाव जीत गये।

साल 1983 में सर्वसम्मति से एनटीआर तेलुगु देशम विधायक दल के नेता चुने गये। इस प्रकार पहली बार आंध्र प्रदेश में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। एनटीआर के मंत्रिमंडल में दस कैबिनेट और पांच राज्य मंत्री बने थे। एनटी रामाराव आंध्र-प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री थे। साल 1983 से 1995 के बीच एनटीआर तीन बार इस पद के लिए चुने गये थे। जन्म 28 मई 1923 को मद्रास प्रेसीडेंसी के कृष्ण जिले के गुड़िवाड़ा तालुक के एक छोटे से ग्राम निम्माकुरु में हुआ था।

श्रद्धांजलि अर्पित करती हुई लक्ष्मी पार्वती

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अभिनय

रामाराव हिन्दू देवताओं जैसे कृष्ण और राम के जीवन से सम्बंधित फिल्मों में अभिनय किया। इस अभिनय को दर्शकों ने काफी सराहना की। उन्होंने 250 से ज्यादा तेलुगु फिल्मों में कार्य किया। जिसके कारण वो तेलुगु फिल्मों के इतिहास में सबसे लोकप्रिय अभिनताओं में से एक माने जाने लगे हैं। तेलुगु के अलावा उन्होंने तमिल और हिंदी भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सन 1968 में पद्मश्री उपाधि से सम्मानित किया।

बसव तारकम के साथ रामाराव

प्रारंभिक जीवन

नन्दमूरि तारक रामाराव की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही एक शिक्षक सुब्बा राव से ग्रहण की। उनके माता-पिता ने बचपन में ही उन्हें उनके मामा को गोद दे दिया था। गांव में अच्छी शिक्षा का प्रबंध नहीं था। इसलिए रामाराव अपने गांव में महज पांचवीं कक्षा तक ही पढाई कर पाए। इसके इसके बाद वह अपने दत्तक माता-पिता के साथ विजयवाड़ा चले गए। यहां पर नगरनिगम के विद्यालय में दाखिला लिया।

उन्होंने सन 1940 में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए विजयवाड़ा के एसआरआर और सीवीआर कॉलेज में दाखिला लिया। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए पढ़ाई के दौरान रामाराव अपने परिवार की मदद करने के लिए विजयवाड़ा के स्थानीय होटलों में दूध वितरण का कार्य करते थे। वर्ष 1945 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के लिए आन्ध्र-क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया। सन 1942 में उन्होंने अपने मामा की बेटी के साथ विवाह किया।

जनसभा को संबोधित करते हुए एनटीआर

रामाराव का फिल्मी कॅरियर

एनटीआर ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरूआत 'मना देशम' (1949) नामक तेलुगु फिल्म से शुरू की। इस फिल्म में एनटीआर ने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्होंने एक अंग्रेजी नाटक पिजारो पर आधारित और बीए सुब्बाराव द्वारा निर्देशित फिल्म 'पल्लेटुरी पिल्ला' में अभिनय किया। इस फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और रामाराव एक लोकप्रिय अभिनेता बन गए।

एनटीआर का भरापूरा परिवार (फाइल फोटो)

पौराणिक फिल्म

एनटीआर की पहली पौराणिक फिल्मे 'माया बाज़ार' में उन्होंने हिन्दू देवता कृष्ण की भूमिका निभाई। यह फिल्म भी बहुत कामयाब हुई। जिसके बाद रामाराव ने अधिकतर हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने भगवान राम, कृष्ण, भीष्म, अर्जुन, कर्ण, दुर्योधन, विष्णु, शिव आदि के किरदार निभाए। उन्होंने 17 फिल्मों में कृष्ण का अभिनय किया। जिनमें प्रमुख- 'श्री कृष्णार्जुन युद्धम' 'कर्ण' और 'दानवीर सूर कर्ण' फिल्म हैं।

एनटीआर (फाइल फोटो)

आधुनिक फिल्म

बाद के सालों में एनटी रामाराव ने पौराणिक फिल्मों को छोड़कर ऐसे फिल्मों में काम किया जो वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ लड़ता है। ये फिल्में आम आदमी के बीच बहुत लोकप्रिय हुई। इनमें प्रमुख हैं 'देवुडु चेसिना मनुशुलु' 'अ़डवी रामुडु' 'ड्राईवर रामुडु' 'वेटगाडु' 'सरदार पापा रायुडु' 'जस्टिस चौधरी' आदि।

पुरस्कार

एनटी रामाराव ने फिल्मों में पटकथा लेखन भी किया। उन्होंने फिल्म निर्माता के तौर पर कई फिल्में भी बनाई और राजनीति में प्रवेश के बाद भी फिल्मों में कार्य करते रहे। उनकी प्रतिभा और फिल्म जगत में योगदान के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए उनके नाम पर एनटीआर नेशनल अवॉर्ड दिया जाता है।

एनटी रामाराव की राजनीतिक प्रवेश

एनटी रामाराव ने सन 1982 में तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना कर राजनीति में प्रवेश किया। राजनीति में प्रवेश का मुख्य कारण था आंध्र प्रदेश को कांग्रेस के राज और आधिपत्य से मुक्ति दिलाना। राजनैतिक जीवन प्रारंभ करने के वक़्त एनटी रामाराव तेलुगु सिनेमा के सफल और लोकप्रिय अभिनेता थे। चुनावों में उनकी पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली। 9 जनवरी 1983 को एनटी रामाराव अपने दस कैबिनेट और पांच राज्य मंत्रिओं के साथ आंध्र प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री बने। 1983 से 1994 के बीच वह तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। अपने पहले कार्यकाल के दौरान एनटी रामाराव ने जन मानस को एकत्र करना शुरू किया और महिलाओं और समाज के अन्य पिछड़े वर्गों को मुख्य धारा में लाने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री पद से हटाया

अगस्त 1984 में आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल रामलाल ने उन्हें हटाकर नांदेडला भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया। इसका भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रधानमंत्री ने राज्यपाल रामलाल को हटाकर शंकर दयाल शर्मा को नया राज्यपाल नियुक्त किया। शंकर दयाल शर्मा ने रामाराव को सितम्बर 1984 में फिर से मुख्य मंत्री बनाया।

टीडीपी की हवा

एनटी रामाराव इतने लोकप्रिय थे कि इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी। मगर आंध्र-प्रदेश में कांग्रेस नहीं जीत पाई। इतना ही नहीं तेलुगु देशम को लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल भी बन गया। साल 1989 के चुनाव में विरोधी लहर के कारण तेलुगु देशम पार्टी चुनाव हार गयी और कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापस आ गयी। साल 1994 में रामाराव दोबारा सत्ता में लौटे। तेलुगु देशम पार्टी की 226 सीटों पर विजय हुई। इस बार एनटी रामाराव महज 9 महीने के लिए ही मुख्यमंत्री पद रह पाए। क्योंकि उनके दामाद चंद्रबाबू नायुडू ने एक षड्यंत्र के तहत रामाराव को पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद से हटा दिया। इस सदमें से एनटीआर कभी संवर नहीं पाये।

व्यक्तिगत जीवन

एनटी रामा राव ने साल 1942 में अपने मामा की बेटी बासव तारकम से विवाह किया। रामाराव और तारकम को आठ बेटे और चार बेटियां संतान थीं। उनकी पत्नी बासव तारकम का साल 1985 में निधन हो गया। साल 1993 में रामाराव ने अपने सत्तर साल की आयु में तेलुगु लेखिका लक्ष्मी पार्वती से पुनः विवाह किया। मगर एनटीआर परिवार वालों ने लक्ष्मी पार्वती को कभी भी स्वीकार नहीं किया।

बच्चे

नन्दमूरि रामकृष्णा सीनियर, नन्दमूरि जयकृष्णा, नन्दमूरि साईंकृष्णा, नन्दमूरि हरिकृष्णा, नन्दमूरि मोहनकृष्णा, नन्दमूरि बालाकृष्णा, नन्दमूरि रामकृष्णा जूनियर, नन्दमूरि जयशंकर कृष्णा, गणपति लोकेश्वरी, डी पुरंदेश्वरी, नर भुवनेश्वरी, कान्तमनेनी और उमा महेश्वरी हैं।

लक्ष्मी पार्वती

लक्ष्मी पार्वती ने एनटीआर की 23वें पुण्यतिथि पर कहा, "दिवंगत एनटीआर हमेशा तेलुगु लोगों के दिलों में बसे हैं। मगर मेरे दिल में लगी आग अब भी बुझी नहीं है। आंखों के आंसू अब भी नहीं सूखे हैं। एनटीआर की आत्मा अब भी शांत नहीं हुई है। उनकी आत्मा अब भी भटक रही है।"

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