बाबू के चार साल : आंध्र प्रदेश में बढ़े हैं बलात्कार व अत्याचार के मामले 

डिजाइन फोटो  - Sakshi Samachar

अमरावती : मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के चार साल के शासनकाल में आंध्र प्रदेश अपराधियों का केंद्र बनकर उभरा है। राज्य में महिलाओं सहित अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों पर अत्याचार के मामलों का हजारों की संख्या में दर्ज होना चिंता का विषय है। ये केवल सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित आंकड़े हैं, प्रकाश में नहीं आने वाले मामले अनेक हैं।

सरकार की उदासीनता और सत्ता की आड़ में टीडीपी नेता बच्चों पर भी अत्याचार कर रहे हैं। चंद्रबाबू के शासनकाल में राज्य पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र भी पिछड़ गया है। वर्ष 2022, 2029 और 2050 तक राज्य का विकास करने के चंद्रबाबू नायडू के बयान को अधिकारी ही गलत बता रहे हैं।

बच्चों पर हुए 1,738 अपराध

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 में राज्यभर में महिलाओं के साथ 15,173 अपराध हुए थे, जबकि बच्चों पर 1,738 हुए। विभिन्न कारणों से 967 हत्याएं हुईं। 908 अपहरण के मामले, 1,057 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। संपत्ति विवाद को लेकर करीब 17,688 मामले सामने आए हैं। अनुसूचित जाति व जनजातियों पर ज्यादतियां दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2016-17 में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के साथ 2,332 अपराध हुए थे, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान यह संख्या बढ़कर 3,289 तक पहुंच गई है।

मानव विकास की सूची में पिछे

गरीबों को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने के मामले में सरकार विफल हो जाने से जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर राज्य में लगातर बढ़ती जा रही है। खून की कमी वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों की गर्भ में मौत हो रही है। वर्ष 2016-17 में 584 जच्चाओं की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2017-18 में यह संख्या बढ़कर 653 तक पहुंचना मानव विकास की सूची में पिछड़ेपन को दर्शाती है। वर्ष 2016-17 में 6,966 शिशुओं की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2017-18 में यह संख्या बढ़कर 8,761 तक जा पहुंची, जो पौष्टिक भोजन की आपूर्ति में खामियों को दर्शाती है।

राज्य में पांच साल से कम आयुवाले बच्चों की संख्या 23.82 लाख है, जिनमें 8.69 बच्चों के विकास में खामी होने का पता चला है, जबकि 3.45 लाख बच्चे मोटापे की वजह से परेशान हैं। 2.70 लाख बच्चों की वजन सामान्य से भी कम है। 1.78 लाख बच्चों का कद उनके भार के अनुरूप नहीं होने से परेशान हैं। ये सभी आंकड़ें मानव विकास की सूची में दर्शाते हैं कि राज्य पिछड़ा हुआ है।

पिछले तीन वर्षों से राज्य में प्राथमिक कृषि विपरित दिशा में बढ़ रही है। कृषि से जुड़े बागवानी, पशु संवर्धन, मत्स्यपालन को मिलाकर बाबू सरकार कृषि में विकास हासिल करने के झूठे दावे कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक रूप से कृषि विकास दर में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। अगर हम केवल कृषि क्षेत्र की बात करें तो वह वर्ष 2014-15 में विकास दर -0.35 फीसदी रही, जबकि 2015-16 में -13.16 फीसदी, वर्ष 2016-17 में -7.01 फीसदी रही है।

राज्य में यदि हम प्रतिव्यक्ति आय को नजरअंदाज करें तो प्रति व्यक्ति कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में वर्ष 2016-17 में 15.28 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि वर्ष 2017-18 में यह केवल 14.87 फीसदी पर सिमट गई। वर्ष 2017-18 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 1,42,054 रुपये था, जो वर्ष 2022 तक आंध्र प्रदेश को देश के तीन प्रमुख राज्यों में से एक बनाकर प्रति व्यक्ति आय को 2.29 लाख रुपये तक बढ़ाने और वर्ष 2019 तक देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य के तौर पर प्रति व्यक्ति आय 9.35 लाख रुपये तथा वर्ष 2050 तक विश्व में सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में प्रति व्यक्ति आय बढ़कार 1.67 करोड़ रुपये का दावा कर रहे हैं सीएम चंद्रबाबू नायडू।

देश का विकसित राज्य हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय वर्तमान में 1,96,982 रुपये है, जबकि तेलंगाना में प्रति व्यक्ति आय 1,75,534 रुपये है, जबकि आंध्र प्रदेश में पिछले वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति कर्ज में 6,682 रुपये बढ़ा है। राज्य के बजट प्रस्तावों पर अगर हम गौर करें तो प्रति व्यक्ति कर्ज बढ़कर 49,887 रुपये हुआ है। बजटीय आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के अंत तक राज्य का कर्जा बढ़कर 2,49,435,37 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

आंध्र प्रदेश पर कर्ज का भार

वित्त वर्ष कर्ज (करोड़ों में)

2014-15 1,48,743.45

2015-16 1,73,853.60

2016-17 2,01,314,04

2017-18 2,25,234,00

2018-19 2,49,435,37

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