167वें दिन की पदयात्रा डायरी, चंद्रबाबू आपने मजदूरों के साथ धोखा और पाप किया है

डिजाइन फोटो - Sakshi Samachar

21.05.2018, सोमवार

पेंटपाडू, पश्मिमी गोदावरी जिला

यह है चंद्रबाबू नायुडू के शासनकाल में वैद्य स्वास्थ्य चिकित्सा की दीन गाथा।

वाईएसआरसीपी के शुभचिंतक और प्रतिष्ठित विद्वान दुव्वुरि सोमयाजुलु के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पितकर उसी रात को पदयात्रा शिविर पहुंच गया। महान विद्वान और हमारे मार्ग निर्देशक अब नहीं रहे इस बोझ को मन में दबाये आज सुबह पदयात्रा शुरू की।

इलाज के लिए पैसा नहीं

एक गरीब परिवार की वेंकटरावम्मा अपने दो किडनी खराब हो चुके बेटे को लेकर आई। वह मां अपने बेटे को खुद की किडनी देकर बचाना चाहती है। मगर इलाज का खर्चा कौन देगा? हमारे सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है। हैदराबाद में एपी आरोग्यश्री लागू नहीं होती। सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता से किडनी चिकित्सा करने के लिए निजी अस्पताल तैयार नहीं है। लाखों रुपये खर्चा करके बेटे का इलाज कराने की स्थिति वेंकटरावम्मा की नहीं है। उसके आंखों के सामने उसके बेटे की जान खतरे में दिखायी दे रही है। यह है हमारे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के शासनकाल में गरीब लोगों की दीन गाथा।

सुविधाओं का अभाव

दूसरी ओर लोगों की स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले चिकित्सक और कर्मचारी मिले। रोगियों की सेवा करने को तैयार है। मगर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। सरकार चिकित्सा सुविधाओं को रोक रही है। निजी चिकित्सकों ने कहा कि सालों से लंबित आरोग्यश्री के बिलों का भुगतान इस सरकार ने नहीं किया गया है। अब और आरोग्यश्री के मामले कैसे करें?

फीस पुनर्भुगतान

दंत चिकित्सकों ने बताया कि अब तक उन्हें फीस पुनर्भुगतान नहीं दिया गया है। लाखों रुपये खर्च करके डेंटल कोर्स पूरा करे तो नियुक्ति नहीं है। सरकारी अस्पतालों रिक्त पद है। मगर भर्ती नहीं किया जा रहा है। कम वेतन में निजी अस्पताल में काम नहीं कर पा रहे है। वित्तीय समस्याओं के कारण खुद का क्लिनिक भी खोलने की स्थिति में नहीं है। कुछ चिकित्सक कम वेतन में निजी अस्पतालों में काम कर रहे हैं। किसी बात को लेकर बहस करे तो प्रबंधन के ताने और प्रताड़ना। ज्यादा बहस करे तो नौकरी से निकाल दे दे रहे हैं। यह चंद्रबाबू के शासनकाल की चिकित्सा सुविधा। यह सब देखकर पंगु हो चुकी चिकिस्ता सुविधा को बलशाली बनाने के मेरे संकल्प को और बल मिला है।

सुसंपन्न शहर

आजादी से पहले ही ताडेपल्लीगुडेम हर प्रकार की संपदा से सुसंपन्न शहर है। इस प्रकार यह एक प्रसिद्ध शहर है। उस जमाने से ही यहां पर सड़कें, ट्रेन और जल भंडार की भरपूर सुविधा हैं। अब भी कर्नूल के प्याज के लिए 'केयरऑफएड्रस' ताडेपल्लीगुडेम ही है। यहां पर हमाली, गोदामों में काम करने वाले दैनिक कुली, असंगठित श्रमिक और हजारों मजदूर हैं। मजदूरों ने बताया कि उनका पूरा जीवन गोदामों और मार्केटों काम करते-करते गुजर जा रही है। जब काम मिलता है तो पेट भर खा पाते है। वर्ना भूखा ही रहना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी-बड़ी थैली और वजन सामान उठाने के कारण कम उम्र में उनके पैर के घुटने खराब हो चुके हैं। उनके जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। यह सुनकर मेरा दिल भर गया। इनके जीवन में रोशनी भरने का संकल्प लिये मैं आगे के लिए बढ़ा।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल-

असंगठित श्रमिकों के कल्याण के लिए स्वास्थ्य बीमा, सोशल सेक्यूरिटी, बिना ब्याज का कर्ज ऐसे 15 आश्वासन आपके चुनावी घोषणापत्र के 15वें पेज पर हैं। उन आश्वासनों की अमलावरी नहीं करना इन मजदूरों के साथ धोखा करना नहीं तो और क्या है? ऐसा करके आपको पाप करे जैसा नहीं लग रहा है?

-वाईएस जगन

Advertisement
Back to Top