नई दिल्ली : कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के विधायक केजी बोपैया को कर्नाटक विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किए जाने के खिलाफ शुक्रवार शाम सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है। तीन जजों की बेंच ने मामले को सुनने के बाद कहा कि बीजेपी विधायक केजी बोपैया ही प्रोटेम स्पीकर रहेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि शक्ति परीक्षण का लाइव प्रसारण होना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने न्यायालय में कांग्रेस पक्ष रखा। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीकरी ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि केजी बोपैय्या प्रोटेम स्पीकर चुन लिए गए हैं तो उन्हें शक्ति परीक्षण कराने देना चाहिए। जस्टिस सीकरी ने यह भी कहा कि हम स्पीकर की नियुक्ति नहीं कर सकते हैं।

वहीं मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस बोबड़े ने कहा कि अगर केजी बोपैया को हटाया जाता है तो फ्लोर टेस्ट टलेगा।

बता दें कि कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बोपैया विधानसभा में सबसे वरिष्ठ नेता नहीं हैं। संसदीय रिवाज के अनुसार, सबसे अधिक बार चुने जाने के आधार पर वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाया जा सकता है।

कांग्रेस को डर है कि शनिवार को विधानसभा में पेश किए जाने वाले विश्वास प्रस्ताव को बोपैया ध्वनि मत से पारित करने के बाद बिना मतदान कराए विधानसभा स्थगित कर देंगे। कोर्ट में इसे चुनौती देने और फैसला आने में समय लगेगा। इस बीच बीजेपी के बहुमत जुटाने का पर्याप्त सयम मिल जाएगा।

ऐसे पहले भी कई बार लोकसभा और विधानसभा के अंदर हुआ है, जब बहुमत का आंकड़ा स्पीक के फैसलों के वजह से बदल गया। शिवराज पाटिल, केएच पांडियन, गोविंद सिंह कुंजवाल, धनीराम वर्मा और केसरीनाथ त्रिपाठी की स्पीकर के तौर पर भूमिका विवाद में रही है।

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इसी डर के कारण कांग्रेस की एक टीम ने इस संबंध में याचिका दाखिल करने शुक्रवार शाम सर्वोच्च न्यायालय पहुंची थी। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।