नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के धार जिले में नव आरक्षकों (कांस्टेबल) के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान आरक्षित वर्ग के चयनित उम्मीदवारों के सीने पर उनके वर्ग अर्थात एससी-एसटी दर्ज करने के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(एनएचआरसी) ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे समानता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से चार सप्ताह में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ विस्तृत ब्यौरा मांगा है।

एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के धार जिला अस्पताल में नव आरक्षकों के चिकित्सा परीक्षण के दौरान आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के नंगे सीने पर जातियों को दर्ज किए जाने के मामले को स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर कहा है, "मीडिया रपट से पता चलता है कि यह कृत्य सभ्य समाज में किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह समानता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के साथ चार सप्ताह में जवाब मांगा है।"

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ज्ञात हो कि नव आरक्षकों के सीने पर एससी-एसटी लिखे जाने के मामले ने तूल पकड़ा हुआ है। राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। सोमवार को राहुल गांधी ने ट्वीट किया था, "भाजपा सरकार के जातिवादी रवैये ने देश की छाती पर छुरा मारा है। मध्यप्रदेश में युवाओं के सीने पर एससी-एसटी लिखकर देश के संविधान पर हमला किया है। यह भाजपा और आरएसएस की सोच है। यही सोच कभी दलितों के गले में हांडी टंगवाती थी, शरीर में झाडू बंधवाती थी, मंदिर में घुसने नहीं देती थी। हम इस सोच को हराएंगे।"

प्रदेश की चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस कृत्य को भाजपा की समाज को बांटने वाली सोच का प्रतीक बताते हुए कहा था, "यह भाजपा सरकार की मानसिकता का उदाहरण है। उसकी सिर्फ एक ही सोच और विचारधारा है कि धर्म के नाम पर देश को बांटो, जाति के नाम पर बांटो। अब तो यह हाल हो गया है कि आपकी जाति छाती पर अंकित की जा रही है। यह कलंक दिवस है। इसके लिए शिवराज और मोदी जिम्मेदार हैं।"