वुहान : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में एक संयुक्त आर्थिक परियोजना पर काम करने के लिए सहमति जतायी है। उनकी यह पहल पाकिस्तान को परेशान कर सकती है।

विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले दोनों देशों के प्रमुखों के बीच पहली अनौपचारिक शिखर बैठक में इस बात सहमति बनी है। दो दिन की यह बैठक आज समाप्त हो गई। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के अधिकारी भविष्य में होने वाली चर्चाओं में परियोजना की पहचान करेंगे और उसके तौर-तरीकों एवं रुपरेखा पर काम करेंगे।

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संकट से घिरे अफगानिस्तान में भारत और चीन द्वारा शुरु की जाने वाली यह अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। सूत्रों ने कहा कि अफगानिस्तान में भारत के साथ काम करने के चीन के निर्णय से पाकिस्तान को परेशानी हो सकती है, क्योंकि वह चीन को अपना 'सदाबहार दोस्त' मानता रहा है। चीन को जब अफगानिस्तान में अपना प्रभुत्व बढ़ाना था तब उसने पाकिस्तान का समर्थन किया था।

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पाकिस्तान पर अफगानिस्तान और अमेरिका तालिबान को समर्थन देने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका आरोप था कि पाकिस्तान आतंकी समूहों को अपने यहां सुरक्षित पनाह दे रहा है जो अफगानिस्तान में हमले करते हैं और उसे अस्थिर करने की कोशिश में लगे हैं। पिछले साल दिसंबर में चीन ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक की थी। इसका मकसद दोनों देशों के बीच की दूरियां कम करना था। उस बैठक में चीन ने विवादित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को अफगानिस्तान तक बढ़ाने की भी घोषणा की थी।