अपने प्रशंसकों और जनता दल सेक्युलर जेडी(एस) के कार्यकर्ताओं द्वारा कुमारन्ना के नाम से बुलाए जाने वाले हर्धननहल्ली दोड्डेगौड़ा कुमार स्वामी क्या इस बार चुनाव में सीएम सिद्दारमैया की आंख की किरकिरी बनेंगे ? क्या कर्नाटक में सत्ता बचाए रखने की कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरेंगे? कुमार स्वामी की जनसभाओं में बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोगों को देख लगात है कि इस बार कर्नाटक विधानसभा चुनाव सस्पेन्स थ्रिलर से कुछ कम नहीं है।

दो महीने पहले तक कांग्रेस और भाजपा ने जेडी(एस) को हल्के से लिया था। अपने नेतृत्व में पार्टी को आगे ले जा रहे कुमार स्वामी की जनसभाओं व रैलियों में जनसैलाब उमड़ रहा है। वास्तव में राहुल गांधी और अमित शाह की सभाओं के मुकाबले कुमार स्वामी की सभाओं में लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। हालांकि कुमार स्वामी के साथ ऐसे कोई दिग्गज नेता भी नहीं हैं। जेडी(एस) प्रमुख की सभाओं में कांग्रेस और भाजपा की सभाओं की तरह पैसा भी नहीं बहाया जा रहा है। परंतु बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोगों को देख कुमार स्वामी और जेडी (एस) के नेताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है।

ये चुनाव कांग्रेस और भाजपा की तरह जेडी (एस) के लिये भी काफी मायने रखते हैं। वर्ष 2006 में कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन सरकार में मतभेदों के बाद कुमार स्वामी ने भाजपा के साथ गठजोड़ कर 20 महीने तक शासन किया। कर्नाटक के इतिहास में लोगों के बीच रहने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री के रूप में नाम कमाया। वर्ष 2008 चुनाव में सत्ता छीने जाने के बाद कर्नाटक में फिर से पुराना इतिहास दोहराने के लिये जेडी (एस) और कुमार स्वामी अथक प्रयास कर रहे हैं।

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इस बार चुनाव नहीं जीतने पर कर्नाटक में जेडी(एस) के अस्थित्व पर सवाल उठने का डर कुमार स्वामी को सता रहा है। पुराने मैसूर क्षेत्र में जेडी(एस) की पकड़ काफी मजबूत है और वह करीब 75 विधानसभा सीटों पर जेडी(एस) कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रही है। मैसूर, हासन, मंड्या, तुमकूरु जिले सहित बेंगलुरु के सीमावर्ती क्षेत्रों में जेडी (एस) का खासा असर देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ समय से लगातार अपनी स्थिति मजबूत करती जेडी(एस) ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।

छह महीने पहले हॉर्ट आपरेशन करा चुके कुमार स्वामी बहुत कम समय में सामान्य होकर चुनावी दंगल में उतर चुके हैं और राज्यभर में तूफानी चुनावी दौरे कर रहे हैं। बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोगों को अगर मतदाताओं में तब्दील कर सकेंगे तो चुनाव परिणाम के बाद यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वह किंग मेकर बन जाएंगे।

कांग्रेस या भाजपा अगर अपने बल पर सत्ता हासिल कर लेती हैं तो जेडी(एस) के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा। जेडी (एस) चाहती है कि अगर चुनावी नतीजे अगर हंग विधानसभा के होंगे, तो कर्नाटक की राजनीति में उसका किंग मेकर बनना तय है।

कर्नाटक के सीएम सिद्दरामैया जेडी(एस) को भाजपा की 'बी टीम' बताते हुए प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों पार्टियों के बीच अनैतिक गठबंधन है। परंतु भाजपा चाहती है कि जेडी(एस) कांग्रेस पार्टी की सीटों में अधिक से अधिक सेंध लगाएं, ताकि वह आसानी से सरकार बना सके।

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उधर, कुमार स्वामी जनसभाओं में कहते दिख रहे हैं कि उन्हें किसी की 'बी टीम' बनकर नहीं रहना है और चुनाव में उन्हीं की पार्टी जीतने जा रही है। कुमार स्वामी को इस बात का विश्वास है कि राज्य में वह सिद्दरामैया और बीएस येदुरप्पा से ज्यादा लोकप्रिय नेता हैं।

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी के अधिकांश नेता भाजपा पर हमले तेज करने पर ध्यान केंद्रित करने के मूड़ में हैं। उनका कहना है कि अगर कुमार स्वामी पर हमले तेज करेंगे तो उसका फायदा जेडी(एस) को होगा। राज्य की तीनों प्रमुख पार्टियां चुनावी दांव-पेंच बनाने में लगी हैं, लेकिन कर्नाटक के लोग 12 मई को अपना वोट किसे देंगे, यह देखने के लिए हमें तब इंतजार तो करना ही पड़ेगा।

एस. गोपीनाथ रेड्डी