नई दिल्ली : फेक न्यूज को लेकर देश में लगातार बहस चल रही है। इस मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी की तरफ से फेक न्यूज को लेकर लिए गए फैसले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पलट दिया है। वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि फासीवाद चरम पर पहुंच गया है, जबकि आप एवं माकपा ने मौजूदा स्थिति की तुलना आपातकाल से की है। कांग्रेस अध्यक्ष राहलु गांधी ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट को ‘‘बस एक और साल'' हैशटैग के साथ किया है।

पीएम मोदी ने कहा इस मामले में सरकार का कोई दखल नहीं रहेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मृति ईरानी के मंत्रालय को अपना आदेश वापस लेने के लिए भी कहा है। पीएम द्वारा फैसला पलटवाए जाने के बाद अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ने ट्वीट कर कहा है कि हम पत्रकार संगठनों या फिर प्रेस काउंसिल जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर फेक न्यूज के खिलाफ लड़ेंगे। स्मृति ईरानी ने आगे लिखा कि इस संबंध में कोई पत्रकार या संगठन उनसे मंत्रालय में सीधे में सीधा संपर्क कर सकता है।

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बता दें कि इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी की थी। इस विज्ञप्ति में पत्रकारों की मान्यता के लिए संशोधित दिशा-निर्देश दिए गए थे। नए दिशा निर्देशों में कहा गया था कि अगर पहली बार फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पत्रकार की मान्यता छह महीने तक रद्द कर दी जाएगी।

वहीं अगर दूसरी बार फर्जी खबर की पुष्टी होती है तो एक साल के लिए पत्रकार की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। वहीं तीसरी बार किसी फर्जी खबर के प्रकाश या प्रसारण का दोषी पाए जाने पर पत्रकार की मान्यता स्थाई रूप से रद्द कर दी जाएगी।

विपक्ष ने कहा - आपातकाल जैसे हालात

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘फर्जी खबरसंबंधी दिशा निर्देश को लेकर बढ़ते क्रोध को भांपते हुए प्रधानमंत्री ने अपने स्वयं के आदेश पर पलटी मार ली। स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि नियंत्रण हट रहा है और घबराहट बढ़ रही है।''

उन्होंने इस ट्वीट को ‘‘बस एक और साल'' हैशटैग के साथ किया है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘फासीवाद अपने चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि हिल चुकी मोदी सरकार अपने झूठ के जाल में फंस गई है तथा त्रुटिपूर्ण नियमों के जरिये वह मीडिया में सभी स्वतंत्र आवाजों को दबाना चाहती है।''

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने सवाल किया कि क्या यह कदम संवाददाताओं को प्रतिष्ठान को असहज करने वाली खबर देने से रोकने का प्रयास है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि कौन यह तय करेगा कि कोई खबर फर्जी है। उन्होंने हैरत जतायी कि क्या नियमों का उपयोग संवाददाताओं को परेशान करने के लिए किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रेस की आजादी पर लगाम लगाने के इस कदम को‘ दमनकारी' बताया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि सरकार की चल नहीं रही है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने1970 के दशक में प्रेस की आजादी के लिएलड़ी गई लड़ाई से इसकी तुलना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस कपटपूर्ण कदम की भर्त्सना करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फर्जी खबरों की आड़ में उन खबरों को लेकर मीडिया पर हमला बोल रही है जिनसे वह असहज होती है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘हम स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रेस के पक्ष में हैं और( इसके लिए) प्रतिबद्ध हैं।'' दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि कानून के जरिये इस मुद्दे से सम्मानित ढंग से निबटा जा सकता है।

इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आप नेता आशुतोष ने ट्वीट किया, ‘‘अभी तक मीडिया पर अनौपचारिक आपतकाल था और कुछ को छोड़कर सभी भयभीत थे और कहना मानने लगे थे। अब औपचारिक आपातकाल। प्रेस को नियंत्रित करने वाली सरकार कौन होती है? क्या पत्रकार इस दमनकारी नियम के खिलाफ अपनी आवाज उठायेंगे? जैसा कि उन्होंने मानहानि कानून पर राजीव गांधी के खिलाफ उठाया था। मुझे संदेह है।'