नई दिल्ली : देश के पहले स्मार्ट और हरित ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज यह जानकारी दी।

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में पांच लाख टन सीमेंट और एक लाख टन इस्पात का इस्तेमाल हुआ है। प्रधानमंत्री 135 किलोमीटर के छह लेन वाले एक्सप्रेसवे को राष्ट्र को समर्पित करेंगे जिसका इस्तेमाल करने पर कुछ पाबंदियां होंगी।

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इसके साथ ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस मार्ग का पहला चरण भी खुल जाएगा। दिल्ली की पूर्वी सीमा के बाहर बनाए गए ईस्टर्न पेरिफरल एक्सप्रेस वे के निर्माण पर 11,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे राष्ट्रीय राजधानी में भीड़भाड़ को कम किया जा सकेगा।

ईपीई में स्मार्ट और इंटेलिजेंट राजमार्ग यातायात प्रबंधन प्रणाली( एफटीएमएस) और वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन प्रणाली (वीडीएस) लगाई गई है। साथ ही इसमें ऐसी बंद टोल प्रणाली है, जिसमें पूरे मार्ग के लिए नहीं, बल्कि किसी के द्वारा की गई यात्रा के आधार पर टोल लगेगा।

इस एक्सप्रेसवे को सौर लाइटों से रोशन किया जाएगा। गडकरी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इसी महीने प्रधानमंत्री करेंगे। यह राजमार्ग निर्माण में एक नया पैमाना होगा। पर्यावरणनुकूल होने के साथ इसमें विश्वस्तरीय सुरक्षा फीचर और स्मार्ट- इंटरैक्टिव ढांचे की खूबियां हैं।

इस नई परियोजना का शिलान्यास मोदी ने 5 नवंबर, 2015 को किया था। इससे रोजाना राष्ट्रीय राजधानी से गुजरने वाले करीब दो लाख वाहनों को इस बाईपास पर भेजा जा सकेगा, जिससे प्रदूषण में भी कमी आएगी। मंत्री ने बताया कि परियोजना केकेवल निर्माण की लागत ही 4,420 करोड़ रुपये है।

गडकरी ने दावा किया कि इस परियोजना को 500 दिन के रिकॉर्ड समय में पूरा होने जा रही है, जबकि लक्ष्य 910 दिन का था। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को प्रदूषण पर अंकुश की दृष्टि से डिजाइन किया गया है। इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों को भीड़भाड़ से मुक्त करने में मदद मिलेगी।

कोई भी ऐसा वाणिज्यिक वाहन जिसे दिल्ली नहीं आना है, उसे दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है, जिसमें पूरे मार्ग पर सौर लाइटें लगी होंगी। इस एक्सप्रेसवे पर आठ सौर बिजली संयंत्र हैं, जिनकी क्षमता चार मेगावॉट की है। एक्सप्रेसवे पर पेड़ पौधे लगाने के लिए ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया गया है।