रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि छोटे क्षेत्रीय दलों के समर्थन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रीय विकल्प नहीं हासिल किया जा सकता। रमन का मानना है कि विपक्ष का कोई भी गठजोड़ अंतर्निहित विरोधाभासों के कारण खुद ही टूट जाएगा।

उन्होंने साथ ही कहा कि कुछ संसदीय उपचुनाव हारने से भारतीय जनता पार्टी के अगले साल लोकसभा चुनाव जीतने की संभावना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, "एक समय इंदिरा (गांधी) बनाम सभी थे, और अब मोदीजी बनाम सभी हैं। यह मोदीजी की बढ़ती लोकप्रियता का नतीजा है। कुछ छोटी पार्टियां उन्हें रोकने के प्रयास में ध्रुवीकरण कर सकती हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाएंगी।"

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रमन ने हैरानी जताई कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में सत्ता में नहीं है, फिर वे 2019 में सत्ता में लौटने का सपना कैसे देख रहे हैं। रमन ने कहा, "उन्हें समर्थन कहां से हासिल होगा। छोटे क्षेत्रीय समूहों के समर्थन से कभी राष्ट्रीय विकल्प नहीं हासिल किया जा सकता। ये पार्टियां मोदीजी की लोकप्रियता के कारण एकसाथ आ रही हैं। इतिहास देखें, वे कभी एकजुट नहीं रह सकते।"

उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री) राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की दोस्त और राज्य स्तर पर दुश्मन कैसे हो सकती हैं। यह नहीं चलने वाला।" वर्ष 2003 से राज्य की सत्ता पर आसीन मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच राज्य जीतने के बाद कुछ उपचुनावों में हार को मोदी विरोधी लहर नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा, "हमने वे राज्य जीते हैं, जहां हमारी कोई स्थिति नहीं थी। हालांकि हम गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव हार गए, लेकिन हमने पिछले चार सालों में सभी प्रमुख चुनाव जीते हैं। उपचुनाव के नतीजे लोगों की तात्कालिक प्रतिक्रिया है। इसका मोदीजी के प्रभाव पर कोई असर नहीं होगा। हम मोदीजी के कारण ही अधिकांश राज्यों में सत्ता में हैं।"

सिंह ने दावा किया कि उनकी सरकार के खिलाफ कोई विरोधी लहर नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो भी वह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इससे निपट लेंगे। फिर से सत्ता में लौटने का विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय दल होने के नाते कांग्रेस भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और नवगठित छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (सीजेएस) के अध्यक्ष अजित जोगी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा, "अजित जोगी की मौजूदगी का खासा प्रभाव होगा। उन्हें कमतर नहीं आंका जा सकता। अगर कांग्रेस के वोट बैंक में विभाजन होगा, तो हमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर लाभ होगा।" यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस का जोगी के साथ गठजोड़ चुनाव में उनकी संभावना को नुकसान पहुंचा सकता है? रमन ने कहा, "हम उनका मुकाबला तब भी कर चुके हैं, जब उन्होंने एकजुट होकर चुनाव लड़ा था और तब भी जब उन्होंने अकेले लड़ा। लेकिन जब उन्होंने अलग-अलग चुनाव लड़ा, तब हमें ज्यादा फायदा हुआ।"

अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा, "जब 2003 में मैंने मुख्यमंत्री पद संभाला था, तो बिजली नहीं थी, सड़कें नहीं थीं और पीने का पानी भी नहीं था। बुनियादी ढांचा भी नहीं था और पूरी तरह अव्यवस्था की स्थिति थी। लोग देश के अन्य हिस्सों में पलायन करने पर मजबूर थे। भूख से मौतें हो रही थीं।"

उन्होंने कहा, "आज आप देख सकते हैं कि 100 फीसदी घरों में बिजली आपूर्ति है। हमने पूरे राज्य में सड़कों का जाल बिछा दिया है। खाद्य सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से हमने भूख के कारण होने वाली मौतों पर लगाम लगा दिया है। हम छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त राज्य बनाने में भी सफल हुए हैं।"

उन्होंने कहा, "हम स्मार्ट कार्ड की तरह स्वास्थ्य योजनाओं के तहत हर व्यक्ति को 50,000 रुपये दे रहे हैं। हमने छह लाख परिवारों को घर और 35 लाख परिवारों को गैस सिलिंडर दिए हैं। हमने कामगारों के कौशल विकास के लिए कानून बनाया है। वास्तव में मेरे पूरे कार्यकाल में हमने हमारे नागरिकों को सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है।"

राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका के सवाल पर आयुर्वेदिक चिकित्सक से राजनेता बने सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमेशा से उनकी प्राथमिकता में रहा है, लेकिन पार्टी अगर उन्हें केंद्र में भेजने का फैसला करती है, तो वह पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगे।