नई दिल्ली : जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव 2019 करीब आता जा रहा है। वैसे-वैसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कुनबे में बिखराव का दौर शुरू हो गया है। इसी माह तेलगु देशम पार्टी ने आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर राजग से समर्थन वापस ले लिया था। वहीं शनिवार को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) ने राजग से नाता तोड़कर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करारा झटका दिया है। GJM ने बीजेपी से नाराजगी के चलते राजग से अलग होने का फैसला लिया है।

राजग से अलग होने के बाद GJM ने बीजेपी पर गोरखाओं का विश्वास तोड़ने का आरोप लगाया है। GJM ऑर्गेनाइजिंग चीफख एलएम लामा ने कहा कि उनकी पार्टी का बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से कोई रिश्ता नहीं है। बताया जा रहा है कि GJM भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष के हालिया बयान से बेहद खफा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी का GJM के साथ सिर्फ चुनावी गठबंधन है।

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एलएम लामा ने कहा कि पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान से बीजेपी नेताओं के उस दावे की पोल खुल गई है, जिसमें वो कहते हैं कि GJM हमारी दोस्त है और NDA का घटक दल है। उन्होंने यह भी कहा कि घोष की टिप्पणी से पीएम मोदी के उस दावे की भी हकीकत सामने आ गई, जिसमें वो कहते हैं कि गोरखाओं का सपना ही उनका सपना है।

लामा ने कहा कि पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष के बयान से यह साफ हो गया है कि गोरखाओं को लेकर बीजेपी न तो गंभीर है और न ही उनके प्रति सहानुभूति रखती है। उन्होंने कहा कि यह सभी जानते हैं कि GJM ने साल 2009 और साल 2014 में दार्जलिंग लोकसभा सीट को बीजेपी को गिफ्ट किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए दार्जलिंग राजनीतिक गेटवे है और यह सिर्फ GJM की बदौलत ही संभव हुआ है। कई सालों से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनके मुद्दों को सुलझाया जाएगा, लेकिन बीजेपी लोगों को सिर्फ धोखा दिया उन्होंने कहा कि बीजेपी की वजह से आज दार्जलिंग की पहाड़िया अविश्वास और राजनीतिक उथल-पुथल के माहौल में हैं।