नई दिल्ली : बीजेपी सरकार ट्रिपल तलाक बिल को लेकर दावे करती रही है कि मुस्लिम महिलाएं उनके साथ हैं। सरकार को आईना दिखाते हुए तीन तलाक बिल के खिलाफ पुणे में परदानशीं महिलाओं ने मार्च निकाला। इन महिलाओं की दलील है कि अल्लाह के कानून में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें कि केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए मुस्लिम वीमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज), 2017 बिल को राज्य सभा में पास कराने की पुरजोर कोशिश कर रही है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी राय दी है, साथ ही सरकार से इस बारे में कानून बनाने को कहा है।

मुस्लिम महिलाओं का विरोध प्रदर्शन 
मुस्लिम महिलाओं का विरोध प्रदर्शन 

इस बिल को लोकसभा में 2017 के शीतकालीन सत्र के दौरान दिसंबर में ही पारित कराया लिया गया था। जबकि राज्य सभा में विपक्ष इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग पर अड़ा है। वहीं सरकार इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।

कुछ मुस्लिम संगठनों की दलील है कि तीन तलाक प्रथा महिलाओं की जिंदगी को दूभर बना रही है। इस तरह के कई मामले सामने आए हैं जब फोन पर या तैश में आकर पति ने एकबारगी पत्नी को तीन तलाक कहकर त्याग दिया।

यहां तक कि भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) ने सरकार के तीन तलाक के खिलाफ बिल का समर्थन किया है।

मुस्लिम महिलाओं का विरोध प्रदर्शन 
मुस्लिम महिलाओं का विरोध प्रदर्शन 

वहीं पुणे में विरोध कर रही महिलाओं ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का समर्थन किया। इन महिलाओं का दावा है कि अल्लाह ने इनके हक में जो भी कानून बनाया है वो इन्हें मंजूर है। हालांकि इन महिलाओं ने ये भी दलील दी की एक बार में तीन तलाक कहने का उल्लेख शरीयत में है ही नहीं।

'हुकूमत बदल सकती है, शरीयत नहीं' 'हम ट्रिपल तलाक बिल को खारिज करते हैं' तख्तियों पर लिखे इन स्लोगन्स के साथ महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए।