विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य के लिये विशेष दर्जा हासिल करने की मांग को लेकर संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने से कोई फायदा नहीं है। बाबू सोमवार को पोलवरम परियोजना के दौरै के बाद मीडिया और विजयवाड़ा स्थित माकीनेनी बसवपुन्नय्या स्टेडियम में आयोजित मादिगा जनसभा में भाग लेते हुए मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने के मुद्दे बोल रहे थे।

विशेष दर्जे के लिये अविश्वास प्रस्ताव लाने को तैयार रहने संबंधी वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख वाईएस जगनमोहन रेड्डी के बयान के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको पता होना चाहिए कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये आप के पास कम से कम 54 सांसद होने चाहिए और अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान हमारी कोशिश का आखिरी हथियार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में सभी पार्टियों के संसदों की संख्या मिलाने के बाद भी 50 सांसद नहीं हैं, तो ऐसे में हमें कुछ अन्य पार्टियों की मदद से इंसाफ मिलने तक संघर्ष करने की आवश्यकता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि संघर्ष कर कुछ भी हासिल किया जा सकता है, ऐसे में अगर हम अभी इस्तीफा दे देंगे, तो संसद में हमारी तरफ से आवाज उठाने वाला नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं, तो उससे पहले हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर बहुमत किसके पास है।

बहुमत होने पर अविश्वास प्रस्ताव पेश करते भी हैं, तो छह महीने तक उस बारे में चर्चा की संभावना ही नहीं रहती। इस लिये विशेष दर्जे के लिए संघर्ष करना सही रास्ता है और मैं इस आंदोलन की अगुवाई करूंगा और इसके लिये विपक्ष का सहयोग चाहिए। परंतु जगन का यह कहना सही नहीं है कि मैं आगे चलुंगा और आप सब मेरे पीछे चलिए।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता केंद्र से आंध्रप्रदेश के लिये काफी कुछ मिलने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह बताना होगा कि क्या केंद्र सरकार ने विभाजन के दौरान जो वादे किये थे, उन्हें पूरा किया है याहीं ?

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रधानमंत्री का प्रदेश दौरा संभव नहीं और और लोगों का उनके खिलाफ भड़कने का खतरा है। उन्होंने कहा कि विशेष दर्जे के लिये काम कर रहे सभी नेताओं के साथ जल्द ही एक बार और बैठक की जाएगी।