पटना: राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद फिलहाल चारा घोटाला के सिलसिले में रांची के जेल में बंद हैं। पार्टी पर लालू परिवार की पकड़ कमजोर न पड़े, लिहाजा जेल में रहते लालू प्रसाद ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इसी के तहत लालू प्रसाद ने अपनी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया है।

राबड़ी देवी को मिली इस अहम जिम्मेदारी के बाद पार्टी के कार्यकर्ता और नेताओं में खुशी है। इसके अलावा पार्टी कार्यकारिणी में कई नए चेहरों को जगह दी गई है। साथ ही कई ऐसे लोगों को किनारा कर दिया गया है, जो पार्टी के लिए विवाद की वजह या फिर नकारा साबित हो रहे थे।

सारांश

राष्ट्रीय सचिवों की सूची

कुमकुम राय

जनार्दन पासवान

हर्षवर्धन कुमार

संजय कुमार (दिल्ली)

अजय नंदा (केरल)

नसीम खाना (उत्तर प्रदेश)

विधायक रविंद्र सिंह

मो. इकबाल (महाराष्ट्र)

अन्नू चाको (केरल)

राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छाया है लालू परिवार

राजद राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को अहमियत दी गई है। इसमें लालू की विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, प्रेमचंद गुप्ता, बुलो मंडल, राम जेठमलानी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब और एमएए फातिमी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाकी सदस्यों में शामिल हैं पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम, गौतम सागर राणा और अब्दुल गफूर।

राजद में इस बड़े बदलाव की बाबत पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव ने मीडिया को जानकारी दी। राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एसएम कमर आलम ने उम्मीद जताई कि इस बदलाव के बाद संगठन में और मजबूती आएगी।

लालू प्रसाद भले जेल में रहें, वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने रहेंगे। इसके बाद उपाध्यक्ष पद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, शिवानंद तिवारी और राबड़ी देवी के साथ इलियास हुसैन और मंगनी लाल मंडल को शामिल किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव के तौर पर कमर आलम बने रहेंगे।

पार्टी में कई राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हैं। इनमें शामिल हैं जयप्रकाश नारायण यादव, कांति सिंह, विद्यासागर निषाद, आलोक मेहता, सर्वजीत पासवान, भोला यादव और रण विजय सिंह आदि।

हाल के दिनों में लालू प्रसाद और शहाबुद्दीन के बीच संबंधों को लेकर मीडिया में कई सवाल उठाए गए थे। लिहाजा विवादों से बचने के लिए शहाबुद्दीन को पार्टी कार्यकारिणी सदस्य से निकाल दिया गया है। शहाबुद्दीन भी फिलहाल हत्या के मामले में सजायाफ्ता हैं और जेल में बंद हैं। हालांकि शहाबुद्दीन की पत्नी को कार्यकारिणी में जगह दी गई है।