इस्लामाबाद : पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत द्वारा जासूसी के आरोप में मौत की सजा पाए कुलभूषण जाधव अब आतंकवाद और विध्वंस के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस बात की जानकारी वहां के अखबार 'डॉन' ने एक अधिकारी के हवाले से दी है।

अधिकारी ने 'डॉन' को बताया कि जाधव मामले में पाकिस्तान सरकार ने जानकारी प्राप्त करने के लिए 13 भारतीय अधिकारियों से संपर्क की मांग की है। यह एक ऐसा तथ्य है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में प्रस्तुत काउंटर मेमोरियल में भी इस बात का उल्लेख है।

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उन्होंने कहा, लेकिन 'नई दिल्ली का रवैया अडिग रूप से असहयोगी बना हुआ है।' अधिकारी के मुताबिक, 47 वर्षीय जाधव के खिलाफ बहुत सारे मामले हैं, जिसमें उन पर आतंक और नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जासूसी से संबंधित एक मामले का ही अभी समापन हुआ है। बाकी मामलों में कार्यवाही जारी है। अधिकारी ने 13 भारतीय अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया।

उन्होंने डॉन समाचार को बताया, "हम जाधव के प्रबंधकर्ता (हैंडलर) तक पहुंचना चाहते हैं।" पाकिस्तान ने नौसेना में जाधव की सर्विस फाइल, पेंशन भुगतान के बैंक रिकॉर्ड और मुबारक हुसैन पटेल के नाम से जारी पासपोर्ट के बारे में जानकारी की मांग की है। पाकिस्तान के मुताबिक, जाधव को तीन मार्च 2016 को बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों द्वारा पकड़ा गया था।

अप्रैल 2017 में फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल (एफजीसीएम) ने जाधव को जासूसी के आरोप में 'दोषी पाए जाने पर' मौत की सजा सुनाई थी।

भारत का कहना है कि जाधव बेगुनाह हैं और उन्हें ईरान से अगवा किया गया है। वह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वहां अपने व्यापार को संभालने के लिए गए थे।

डॉन समाचार की खबर के मुताबिक, दोषी ठहराए जाने के खिलाफ जाधव की अपील को सैन्य अपीलीय अदालत ने खारिज कर दिया था। अब उनकी क्षमा याचिका पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा के पास है।