हैदराबाद : उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एन. संतोष हेगड़े ने इस बात पर दुख जताया है कि जेल गये लोगों का कई साल पहले तक समाजिक बहिष्कार होता था, लेकिन आज उन्हें माला पहनायी जाती है।

पूर्व सॉलीसीटर जनरनल ने बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान के रुझान का जिक्र किया, जिसमें लालू प्रसाद नीत राजद ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी।

उन्होंने इस बात का जिक्र किया, लालू प्रसाद को चार साल की सजा सुनाई गई थी, उन्होंने उच्च न्यायालय से जमानत ली। उनकी पार्टी ने बिहार में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की ( पिछले विधानसभा चुनाव में)।

कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त ने यह याद किया कि जब वह छोटे थे, तब समाज उन लोगों का बहिष्कार किया करता था जो जेल गए होते थे।

उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा, आज, ऐसा नहीं है। आज, लोग जेल जाते हैं और जमानत लेते हैं और वापस आते हैं और सैकड़ों लोग उन्हें माला पहनाने के लिए उनका इंतजार कर रहे होते हैं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ जेल जाना ही सजा नहीं है क्योंकि समाज का बहिष्कार करने से बुरे लोगों को अच्छे लोगों से दूर किया जाता ह। हेगड़े ने दोषसिद्धि की बहुत खराब दर को बेहतर करने की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में ऐसे लोग बमुश्किल 25-30 फीसदी है।

उन्होंने कहा कि लालू के खिलाफ 1996 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था, पहली बार 2014 में दोष सिद्धि हुई। फिर वह उच्च न्यायालय गए, उच्च न्यायालय में 10 साल लग सकता है और फिर उच्चतम न्यायालय जाएंगे। क्या आखिरकार उन्हें सजा होगी? सिर्फ यह एक मामला नहीं है यह अन्य मामलों में भी हुआ है।

हेगड़े ने नेताओं की संलिप्तता वाले मामलों में फैसले के लिए कम से कम 12 विशेष अदालतें गठित किए जाने के सरकार के कदम का स्वागत किया।