भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयासों के तहत नर्मदा नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अगले साल दो जुलाई को एक ही दिन में आठ करोड पौधे लगाए जाएंगे।

चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर कल जबलपुर स्थित भेडाघाट में आयोजित भव्य समारोह को संबोधित करते हुए कहा, नर्मदा कैचमेंट (कछार) क्षेत्र के जिलों में आगामी दो जुलाई को एक ही दिन में आठ करोड पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने नर्मदा सेवा समितियों और आम नागरिकों का आह्वान किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे आएं और पौधे लगाने तथा उनकी रक्षा करने के लिए संकल्प लें। कार्यक्रम में मौजूद विशाल जनसमूह ने जनघोष करते हुए इस संकल्प के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

चौहान ने कहा कि एक वर्ष पहले एक संकल्प के साथ नर्मदा सेवा यात्रा शुरु हुई थी और गांव-गांव में गठित नर्मदा सेवा समितियों तथा आम नागरिकों ने पूरी आस्था के साथ यात्रा के दौरान अपना योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार गंदे मल-जल को नर्मदा में मिलने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के प्रति कृतसंकल्प है। इसके लिए नर्मदा तट के शहरों में टरीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे और शोधित जल को खेतों और बगीचों में सिंचाई के लिए प्रवाहित किया जाएगा।

चौहान ने कहा कि नर्मदा तट के अन्य शहरों में टरीटमेंट प्लांट लगाने के लिए 1,400 करोड रपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनका काम मार्च में शुरु हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि नर्मदा के दोनों तटों के ज्यादातर गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो चुके हैं। शेष गांवों को भी शीघ्र ही ओडीएफ बनाया जाएगा।

चौहान ने कहा कि नर्मदा तट के 16 जिलों सहित अन्य नगरों में भी 4,000 मुक्तिधाम (शमशान) बनाए गए हैं तथा अगले साल 8,000 मुक्तिधाम बनाए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस साल दो जुलाई को भी एक ही दिन में नर्मदा नदी के कछार में लगभग दो दर्जन से ज्यादा किस्म के 6।63 करोड पौधे रोपे थे और इसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है, जो अब तक विचाराधीन है। इनमें फलदार और छायादार किस्मों में आम, आंवला, नीम, पीपल, बरगद, महुआ, जामुन, खमेर, शीशम, कदम, बेल, अर्जुन, बबूल, बांस, इमली, गूलर, खेर तथा कृषि वानिकी के तहत अमरुद, संतरा, नींबू, कटहल, सीताफल, अनार, अचार, चीकू, बेर, मुनगा आदि के पौधे शामिल थे।

चौहान ने प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने, नदी के प्रवाह को अविरल बनाये रखने और नर्मदा कछार क्षेत्र में जैव-विविधता के संरक्षण के प्रति जन-मानस को जागरुक करने के लिये 11 दिसंबर 2016 से 15 मई 2017 तक नर्मदा के दोनों तटों पर मध्यप्रदेश के 16 जिलों में नर्मदा सेवा यात्रा भी निकाली थी।