कोलकाता: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद 12 और 18 फीसदी की दरों को एक नए स्लैब में विलय करने की संभावनाओं की जांच करेगी। जीएसटी परिषद के सदस्य मोदी ने यह भी कहा कि सामानों के ऊपर लगाए जानेवाले मूल्य टैग में सभी करों समेत मूल्य लिखा होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "जीएसटी परिषद 12 फीसदी और 18 फीसदी के कर दरों को एक नए स्लैब में विलय करने की संभावना पर चर्चा करेगी। यह दर इन दोनों के बीच की एक दर हो सकती है। वहीं फिलहाल 50 वस्तुओं को 28 फीसदी के कर दायरे में रखा गया है, जिसमें से कई वस्तुओं को इससे निकाला जा सकता है।" उन्होंने यहां भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित परस्पर संवाद सत्र को संबोधित करते हुए कहा, "इन सब को राजस्व स्थिर हो जाने के बाद लागू किया जा सकता है और यह कर में उछाल आने पर निर्भर करता है।

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उन्होंने कहा कि परिषद ने 178 सामानों पर कर की दरों को घटाकर कर से जुड़े 90 फीसदी मुद्दों का समाधान कर दिया है। उन्होंने कहा, "मैंने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया है कि वस्तुओं पर अंतिम कीमत सभी करों को मिलाकर दर्ज की जानी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि परिषद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देगी।" जीएसटी दरों पर पुनर्विचार से पहले कर राजस्व को स्थिर किए जाने की जरूरत : सुशील मोदी

माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद सदस्य और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि जीएसटी परिषद के जीएसटी दरों को और तर्कसंगत बनाने या उनका विलय करने पर विचार करने से पहले कर राजस्व को स्थिर बनाए जाने की जरूरत है।

मोदी ने कहा, एक बार कर राजस्व को स्थिर होने दें और इसके संग्रहण में उछाल आने दें, परिषद इसके बाद जीएसटी की दरों को और तर्कसंगत बनाने या 12 और 18 प्रतिशत की दर का विलय करने पर विचार करेगी।  पिछले महीने गुवाहाटी में हुई परिषद की बैठक के बाद कर दरों से संबंधित 90ञ् मुद्दों का समाधान कर दिया गया है. बचे हुए मुद्दों को भी जल्द हल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 28ञ् की उच्चतम कर दर में अब केवल 50 वस्तुएं ही रह गईं हैं।