नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय अयोध्या मामले में मालिकाना हक पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर आठ फरवरी, 2018 से सुनवाई शुरू करेगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2010 के अपने फैसले में विवादित बाबरी मस्जिद स्थल निर्मोही अखाड़ा, भगवान राम देवता व सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने की बात कही थी।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने सभी वकीलों को निर्देश दिया कि वे इस मामले पर सौहार्द्रपूर्वक काम करें और सुनिश्चित करें कि पहले यदि कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किए गए हैं, तो उन सभी दस्तावेजों को दाखिल किया जाए।

राज्यों को सतर्कता बरतने की सलाह

वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बाबरी मस्जिद विध्वंस की 25वीं बरसी पर सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए कदम उठाने को कहा है। एक अधिकारी ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि यह सलाह शुक्रवार को सभी राज्यों के प्रधान सचिवों व पुलिस महानिदेशकों और केंद्रित शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को जारी की गई।

सलाह में कहा गया कि 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस की 25वीं बरसी के मौके पर दोनों समुदायों द्वारा प्रदर्शन किया जा सकता है और यह सलाह दी जाती है कि प्रशासन अत्यधिक सतर्कता को बरकरार रखे और गंभीरता को देखते हुए सभी एहतियाती उपायों को प्रयोग में लाए।

सलाह 2008 में तैयार दिशा-निर्देशों के अनुसार है।

बरसी से एक दिन पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद मामले में अंतिम सुनवाई शुरू की।