नई दिल्ली: विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति एम वैंकेया नायडू से अनुरोध किया है कि वे वरिष्ठ सांसद शरद यादव की सदस्यता रद्द करने के मामले में जल्दबाजी में फैसला करने से बचें। कांग्रेस, राकांपा और वामदलों सहित 17 राजनीतिक दलों के नेताओं ने नायडू को पत्र लिखकर राज्यसभा सदस्य यादव के मामले में संसदीय परंपराओं और नियमों के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला करने की अपील की है। नायडू को इस बाबत पत्र लिखने वालों में कांग्रेस के आनंद शर्मा, राकांपा के तारिक अनवर, राज्यसभा में माकपा संसदीय दल के नेता टी के रंगराजन, पार्टी के मुख्य सचेतक सी पी नारायणन, माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा और तृणमूल कांग्रेस के डेरिक ओ ब्रायन सहित अन्य नेता शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि जदयू पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पार्टी से राज्यसभा सदस्य यादव और अली अनवर की सदस्यता समाप्त करने की नायडू से अनुशंसा की है। बिहार में जदयू, राजद और कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व बने महागठबंधन को तोड़कर केंद्र में सत्तारुढ राजद के साथ जाने के नीतीश के फैसले का विरोध करने के कारण यादव और अनवर की संसद सदस्यता खतरे में आ गयी है। चुनाव आयोग ने भी जदयू पर शरद गुट के दावे को खारिज कर नीतीश गुट को ही असली जदयू बताया है। तारिक अनवर ने बताया कि सभी दलों के नेताओं ने नायडू से यादव की वरिष्ठता, अनुभव और संसद में उनके योगदान को देखते हुये अनुरोध किया है कि उनकी सदस्यता समाप्त करने के मामले में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला करें। उन्होंने बताया कि पत्र लिखने वाले सभी सांसदों ने संसदीय परंपराओं का हवाला देकर इस तरह के मामलों को विशेषाधिकार समिति को सौंपने का अनुरोध किया है। सभी सदस्यों ने नायडू से कहा है कि वे समिति द्वारा मामले की व्यापक जांच किए जाने के बाद इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही कोई फैसला करें।