हैदराबाद : ओमान की कंपनी 'पेट्रोन गल्फ' के बंद हो जाने से 900 भारतीय मजदूर पिछले चार महीनों से वेतन और भोजन के लिये तरस रहे हैं। इनमें से 30 तेलंगाना के और 170 मजदूर आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। गत 8-10 वर्षों से इस कंपनी में काम कर रहे मजदूरों को चार महीने का वेतन, ग्रैच्युटी मिलाकर प्रत्येक व्यक्ति को 3 से 4 लाख रुपये मिलना बाकी है।

मजदूरों ने उनका बकाया राशि की वसूली के लिये लेबर कोर्ट में लड़ाई लड़ने हेतु मस्कत स्थित इंडियन एम्बेसी के नाम पावर ऑफ अटर्नी का अधिकार दिया है।



ओमान से हैदराबाद राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे गल्फ पीड़ित
ओमान से हैदराबाद राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे गल्फ पीड़ित

पहले चरण में विभिन्न राज्यों के 50 लोगों के भारतीय दूतावास ने मुफ्त में विमान की टिकटों की व्यवस्था कर बुधवार (16.08.2017) को मस्कत से भारत भेज दिया है। इनमें तेलंगाना के विकाराबाद जिले के परिगी मंडल के इब्राहिणपट्णम गांव निवासी जड़ला बाबय्या, निजामाबाद जिले के नवीपेट निवासी वोटार्कर भूमेश, आंध्र प्रदेश के गुज्जु लक्ष्मण मूर्ति, चिंता तुलसीराव तथा मोटूरी गणेश ओमन एयर फ्लाइट नंबर डब्ल्यू-वाई-235 के जरिए बुधवार सुबह मस्कत से हैदराबाद एयरपोर्ट पहुंचे। इंडियन सोशल क्लब, तेलंगाना विंग के संयोजक गणेश गुंडेटी ने खर्च के लिये तेलंगाना से जुड़े मजदूरों को 1000 रुपये दिये।

पुनर्वास और इंसाफ के लिये मदद की गुहार

तेलंगाना गल्फ वर्कर्स एसोसिएशन ने दोनों तेलगू भाषी राज्य सरकारों से कंपनी प्रबंधन के झांसे का शिकार होकर वापस लौटे मजदूरों को पुनर्वास मुहैया करवाने और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी बनाकर उनकी मदद करने की अपील की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष नंगी देवेंदर रेड्डी ने सरकार से ओमान की धोखेबाज कंपनी से बकाया वसूली के लिये कानूनी मदद करने का अनुरोध किया है।

साथ ही उन्होंने रोजगार खो चुके मजदूरों को हर संभव नौकरी दिलवाने के लिये मस्कत में भारत की राजदूत इंद्रमनी पांडे द्वारा किये गये प्रयासों की सराहना की।