रायपुर : छत्तीसगढ विधानसभा में आज लगभग 11 घंटे तक धरना में बैठे मरवाही विधायक अमित जोगी समेत तीन विधायक विधानसभा भवन से बाहर निकल गए। जोगी ने आरोप लगाया है कि उन्हें निकालने के लिए मार्शल का प्रयोग किया गया।

वहीं विधानसभा के अधिकारियों के मुताबिक जोगी ने स्वयं मार्शल के साथ बाहर जाने के लिए कहा था। अमित जोगी ने आज यहां भाषा को बताया कि सदन में 11 घंटे तक धरना देने के बाद मार्शलों ने उन्हें बल पूर्वक सदन से बाहर निकाल दिया।

जबकि शाम को संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मार्शल का उपयोग नहीं किया जाएगा तथा लोकतंत्र के दायरे में रहकर समस्या का समाधान निकाला जाएगा। जोगी ने कहा कि सरकार ने शाम को आश्वासन दिया था लेकिन रात तक सरकार इससे मुकर गई क्योंकि उन्होंने देखा कि माहौल बिगड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य के कोने-कोने से लोगों के विधानसभा पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। इसलिए देर रात बल पूर्वक उन्हें सदन से निकाल दिया गया। छत्तीसगढ़ में पहली बार मार्शलों से विधायकों को बाहर निकाला गया है।

उन्होंने कहा कि वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे। 11 अगस्त को राज्य भर से लोग राजधानी में एकत्र होंगे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे तथा मुख्यमंत्री से इसका जवाब मागेंगे। इधर विधानसभा में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जोगी और अन्य विधायकों ने कहा था वह मार्शल के साथ ही बाहर जाएंगे, इसलिए मार्शल को बुलाया गया था।

अधिकारियों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि जोगी ने स्वयं कहा था कि वह मार्शल के साथ बाहर जाएंगे। तब उन्हें कहा गया था मार्शल के साथ उन्हें बाहर भेज दिया जाएगा लेकिन मार्शल उन्हें निकालें ऐसा नहीं किया जाएगा। जब जोगी ने अपनी सहमति दी तब मार्शल को बुलाया गया और विधायक उनके साथ बाहर निकल गए। अधिकारियों ने विधायकों को मार्शल द्वारा बलपूर्वक बाहर निकाले जाने की घटना से इंकार किया है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र इस महीने की एक तारीख से शुरु होकर 11 तारीख तक के लिए तय किया गया था और इस सत्र में कुल आठ बैठकें होनी थीं। लेकिन सत्र को तीन दिनों में ही समाप्त कर दिया गया।

विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल द्वारा सत्र समाप्ति की घोषणा के दौरान सदन में धरना दे रहे मारवाही के विधायक अमित जोगी, बिल्हा के विधायक सियाराम कौशिक और गुंडरदेही के विधायक राजेंद्र राय गर्भगृह में ही धरने पर बैठे रहे। विधायकों की मांग थी कि सत्र को दोबारा आहुत किया जाए और उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।