सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में गरीब आदिवासी किसान ने बैलों की जगह अपनी बेटियों को ही खेत जोतने में लगा दिया। ऐसा नहीं कि गरीब लाचार किसान को अपनी बेटियों से प्यार नहीं। बल्कि गरीबी ने उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। खुद में इतनी ताकत नहीं बची की हल को अपने बूते खींच सके। ऐसे में स्वेच्छा से बेटियों ने पिता का हाथ बंटाया। बैल नहीं होने के कारण बेटियों ने खुद को जोत लिया।

ये कहानी सीएम शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा इलाके की है। नसरुल्लागंज जनपद पंचायत के आदिवासी ग्राम बसंतपुर पांगरि में सरदार बारेला नाम के गरीब किसान के पास अपना खेत जोतने के लिये कोई साधन नहीं है। बारिश के इस मौसम में अगर खेत न जोती गई तो साल भर खाएंगे क्या। ऐसे में सरदार को अपनी दो बेटियों राधा और कुंती ने हाथ आगे बढ़ाया और बैलों की जगह खुद हल खींचने में लग गईं।

गरीब किसान ने इस वाकये पर सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। उसके मुताबिक गरीब किसानों को सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। पेट पालने के लिए मजबूरी में ही उसने बेटियों को हल के साथ जुतने की इजाजत दी।

वहीं जिले में तैनात सरकारी अधिकारी आशीष शर्मा ने किसान को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। साथ ही बेटियों से ऐसा काम नहीं करवाने की हिदायत दी। फिलहाल प्रशासन इस मामले पर विचार कर रही है कि गरीब किसान की किस तरह से मदद की जा सकती है।