नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए प्रचार कल खत्म हो गया, लेकिन विश्व धरोहर स्थल को किसी पार्टी के घोषणापत्र में जगह नहीं मिली, ना ही रैलियों के दौरान भाषणों में उसका जिक्र किया गया।
दिल्ली में कई ऐतिहासिक स्मारक हैं, जो प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक के हैं। इसके अलावा 1,000 से ज्यादा हवेलियां और विभिन्न ऐतिहासिक स्थल हैं जिनमें 150 साल पुराना टाउन हॉल भी शामिल है, जो दिल्ली नगर निगम का मुख्यालय रह चुका है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय गोयल ने कहा कि किसी पार्टी या सरकार ने धरोहर स्थलों की सुध नहीं ली है। धरोहर का विचार अब ‘पेज थ्री' का विषय बन गया है।
गोयल ने धरोहर इमारतों की देखभाल के लिए काम किया है और उनकी धर्मपुरा हवेली जीर्णोद्धार परियोजना अब शहर में संरक्षण का एक मानदंड बन गई है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप मुझसे पूछेें तो मैं राजनीति के ऊपर धरोहर को चुनूंगा। लेकिन नेता घोषणा पत्र या प्रचार में धरोहर के बारे में बात नहीं करते क्योंकि यह उन्हें वोट नहीं दिलाएगा। इसलिए, रोटी, कपडा, पानी, बिजली और सडक मुख्य विषय बना रहेगा जो दुखद है।'' चांदनी चौक और कश्मीरी गेट जैसे इलाकों में संरक्षण के अभाव में कई पुरानी हवेलियों की चमक फीकी पड़ रही है।
एनडीएमसी की स्थायी समिति के एक पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि पुरानी दिल्ली में टाउन हॉल का निर्माण 1866 में हुआ था। नौकरशाही के विलंब के चलते इसके जीर्णोद्धार की योजना खटाई में पड़ गई है। वर्ष 2012 में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में विभाजित कर दिया गया था, एनडीएमसी, एसडीएमसी और ईडीएमसी। हालांकि, धरोहर समिति का गठन एमसीडी के एकीकृत रहने के दौरान किया गया था। दिलचस्प है कि एमसीडी चुनाव में धरोहर स्थल तभी खबर बने जब गोयल और आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने हवेली धर्मपुरा को कर लाभ दिये जाने की दलील दी।

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गोयल ने आरोप लगाया कि धरोहर संरक्षण के विचार को बढावा देने के बजाय आप ने इसका राजनीतिकरण कर दिया और इसलिए लोग कभी धरोहर पर काम करने के लिए आगे नहीं आएंगे।
वहीं, धरोहर की दशा पर केंद्रीय खेल मंत्री के विचारों से धरोहर कार्यकर्ताओं और संरक्षण वास्तुकारों ने भी समान राय जाहिर की है। प्रख्यात शहरी योजनाकार एजीके मेनन ने कहा कि धरोहर को किसी पार्टी के घोषणापत्र में जगह नहीं मिलती। यह उन्हें वोट नहीं दिलाता।
कुछ साल पहले दिल्ली को यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल टैग दिलाने के लिए दिल्ली सरकार के लिए एक दस्तावेज तैयार करने वाले आईएनटीएसीएच दिल्ली चैप्टर के पूर्व संयोजक मेनन ने कहा, ‘‘केंद्र ने नाम वापस ले लिया।'' उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि नेता नये निर्माण कार्य को वृद्धि के तौर पर देखते हैं और पुराने ढांचों की मौजूदगी को वृद्धि में बाधक के तौर पर देखते हैं।
मेनन ने कहा चिराग दिल्ली और बदरपुर जैसे इलाकों में पुराने द्वार क्षीण पड़ रहे हैं, लेकिन इलाके के किसी पार्षद ने कभी जीर्णोद्धार के विचार का प्रस्ताव नहीं दिया।
शहर आधारित एक धरोहर कार्यकर्ता ने कहा कि अगर स्मारकों और गेटवे को छोड भी दें तो, चांदनी चौक में हार्डिंग पुस्तकालय पिछले साल 100 वर्ष का हो गया।