नई दिल्ली : राज्यसभा में सोमवार को विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते ऊपरी सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ा।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जनता दल (युनाइटेड) के नेता शरद यादव ने यह मुद्दा उठाया।

यादव ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गो की अवहेलना कर रही है।

यादव ने कहा कि इन वर्गो के युवकों और युवतियों को प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने के बाद भी प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजा गया।

समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने भी जदयू नेता का समर्थन किया।

सदन के उप सभापति पी.जे. कुरियन ने विपक्षी सदस्यों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन वे उनके आग्रह को नजरअंदाज करके उनके आसन के सामने खड़े हो गए और मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे।

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संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन विपक्षी दलों ने उन्हें भी अनसुना कर दिया।

उसके बाद कुरियन ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही फिर शुरू होते ही बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने फिर से मुद्दा उठाया और उपसभापति से आग्रह किया कि वह संबंधित मंत्री को इस मुद्दे पर बयान देने का निर्देश दें।

कुरियन ने कहा, "मंत्री जो चाहें, कहने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन मैं उन्हें बयान देने के लिए नहीं कह सकता, क्योंकि यह मुद्दा नोटिस दिए बिना उठाया गया है।"

इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए फिर स्थगित कर दी गई।

सदन की कार्यवाही 12 बजे फिर शुरू होने के बाद भी हंगामा बरकरार रहा, जिसके बाद सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने राज्यसभा को पहले 10 मिनट के लिए और उसके बाद आखिरकार अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।