अमरावती (आंध्रप्रदेश): किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ। नया कर्ज नहीं मिल रहा है। किसानों की आत्महत्याएं रुकने का नाम नहीं ले रही है। बैंक रबी फसल को केवल 14 प्रतिशत कर्ज दिये। एपी में कई हिस्सों में अकाल जैसीी स्थिति है। इलाके के किसान कई तरह की समस्याओं से जूझ रह हैं।

उधर मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायुडू खुद का विकास करने की नीति पर काम कर रहे हैं। नायुडू ने 'हेरीटेज संस्था' को फायदा दिलाने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा से हाल ही में कर्ज के लिए समझौता किया है। एपी डेयरी को नुकसान में ढकेलकर हेरीटेज को लाभ पहुंचाने के इस समझौते के निर्णय को लेकर सभी जगह विरोध किया जा रहा है।

नोटबंदी के कारण किसान बर्बाद हो चुके हैं। खरीफ फसल को खरीदने वाला नहीं है। सोने पर भी बैंक कर्ज नहीं दे रही है। परिणामस्वरूप 55 प्रतिशत किसानों ने खेतीबाड़ी करना छोड़ दिया है। 268 मंडलों में अकाल जैसी स्थिति है।

मुख्यमंत्री को ये सब दिखायी नहीं दे रहा है। किंतु अपनी हेरीटेज के लाभ के लिए गत 26 दिसंबर को मुंबई जाकर हेरीटेज किसानों को कर्ज दिलाने के लिए बैंक आफ बड़ौदा़ से समझौता कर आये है। बैंक आफ बड़ौदा़ के मार्केटिंग मैनेजर राकेश भाटिया ने यह जानकारी दी है।

राज्य के विभाजन के बाद एपी डेयरी भारी वित्तीय संकट में घिरी है। अब बाबू के इस हेरिटेज समझौते को लेकर किसान आंदोलन का मूड बना रहे हैं।

दूसरी ओर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सरकारी डेयरी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिलिटर पर बोनस दे रहे हैं। इसके उलट चंद्रबाबू मात्र अपनी हेरीटेज को बचाने के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं। एपी मुख्यमंत्री के इस रवैये आम लोगों में निराशा है।