नई दिल्ली : फांसी से बचने के लिए निर्भया के गुनहगारों ने नया पैंतरा चला है । दोषी मुकेश की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी।

शीर्ष अदालत का यह आदेश आने के बाद मुकेश को उसे मिली मौत की सजा से बचने का अंतिम कानूनी उपाय भी खत्म हो गया है।

न्यायमूर्ति आर. भानुमति, अशोक भूषण और ए.एस. बोपन्ना की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले से संबंधित सभी मामले राष्ट्रपति के समक्ष पेश किए गए थे और इसके बाद उसकी (मुकेश की) दया याचिका पर फैसला किया गया।

कोर्ट ने कहा कि जेल में दोषी को कथित खराब व्यवहार और क्रूरता को आधार मानकर दया नहीं दी जा सकती। मुकेश के वकील के उस तर्क को भी अदालत ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि समय राष्ट्रपति ने दया याचिका पर जल्दबाजी में निर्णय लिया।

कोर्ट ने कहा, "राष्ट्रपति ने जल्दी ही निर्णय ले लिया, तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने बिना सोचे-समझे यह निर्णय लिया।"

वहीं एक और दोषी अक्षय राष्ट्रपति के पास अपनी दया याचिका भेजेगा। अगर ऐसा होता है तो इन चारों दरिंदों को दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टल सकती है, जो 1 फरवरी को दिया जाना है।

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निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में दोषी मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली थी। दिल्ली में 2012 में हुये इस जघन्य अपराध के लिये चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनायी थी।

इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ इस दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।