नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को हुए ऐतिहासिक बोडो समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि यह समझौता बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम वाला साबित होगा। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, "शांति, सद्भाव और एकजुटता की एक नई सुबह में, भारत के लिए आज का दिन बेहद खास है। बोडो समूहों के साथ किया गया यह समझौता बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम वाला साबित होगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "बोडो समझौता आज कई कारणों से अहमियत रखता है। यह सफलतापूर्वक एक फ्रेमवर्क के तहत अग्रणी हितधारकों को एक साथ लाता है। जो लोग पहले सशस्त्र विरोधी समूहों से जुड़े थे, वे अब मुख्यधारा में शामिल होंगे और हमारे देश की प्रगति में योगदान देंगे।"

उन्होंने कहा "बोडो समूहों के साथ समझौता बोडो लोगों की अनूठी संस्कृति को आगे और संरक्षित करते हुए उसे लोकप्रिय बनाएगा। उन्हें विकासोन्मुखी पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच मिलेगी। हम बोडो लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करने को प्रतिबद्ध हैं।"

50 साल पुराने बोडो मुद्दे का निदान हो गया : अमित शाह

इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार को 50 वर्षो से चले आ रहे बोडो मुद्दे के समाधान के लिए समझौता किया गया। शाह ने कहा कि जिस समस्या के कारण करीब 4 हजार लोगों की जान गईं, आज उसका स्थायी व सफल निदान हो गया है।

समझौता किए जाते समय असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, नेडा अध्यक्ष हिमंता विस्वा सरमा, बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य हग्रामा मोहिलारी, एबीएसयू, यूबीपीओ, एनडीएफबी के गोविंदा बासूमतारी, धीरेंद्र बोरा, रंजन दाइमारी तथा सरायगारा घटकों के प्रतिनिधि सहित केंद्र सरकार तथा असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

इस समझौते के बाद 1500 से अधिक हथियारधारी सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएंगे। समझौते में भारत सरकार और राज्य सरकार विशेष विकास पैकेज द्वारा 1500 करोड़ रुपये असम में बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएं शुरू करना शामिल है। इसके अलावा बोडो आंदोलन में मारे गए लोगों के प्रत्येक परिवार को 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा।