नई दिल्ली : महाराष्ट्र के सियासी ड्रामा पर उच्चतम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बुधवार शाम को पांच बजे सदन में बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया है। नवनियुक्त सरकार के पार सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए लगभग 30 घंटे का समय है। अदालत ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। प्रोटेम स्पीकर सभी विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

इसके तुरंत बाद प्रोटेम स्पीकर बहुमत परीक्षण कराएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि पूरी प्रकिया का लाइव प्रसारण होगा साथ ही गुप्त मतदान नहीं होगा। अदालत ने कहा कि संवैधानिक मुद्दों को छूने, लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखने और संविधान को कायम रखने की जरूरत है। अदालत ने यह फैसला हरीश रावत, एसआर बोम्मई केस के आधार पर दिया है।

इससे पहले शनिवार को एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना ने संयुक्त रूप से शीर्ष अदालत में राज्यपाल द्वारा नवनियुक्त सरकार को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की थी। वहीं विपक्ष जल्द से जल्द बहुमत परीक्षण कराने की मांग कर रहा था। जिसे लेकर अदालत ने अपना फैसला दे दिया। अदालत में रविवार और सोमवार को सत्ता और विपक्षी दलों के वकीलों ने तीखी बहस की थी। जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को विश्वास जताया कि महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और उनकी पार्टी कल जीत हासिल करेंगे। संसद भवन परिसर में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में सोनिया ने यह भरोसा जताया। उनसे सवाल किया गया था कि क्या उन्हें महाराष्ट्र में शक्ति परीक्षण के दौरान जीत का विश्वास है तो सोनिया ने कहा, ‘‘बिल्कुल।''

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करें। न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि विधायकों की खरीद फरोख्त से बचने के लिये यह जरूरी है।

महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भाजपा-अजित पवार गठबंधन के लिए करारा तमाचा करार देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दोनों पर 'जनादेश को बंधक बनाने' का आरोप लगाया।