भोपाल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साल 2014 में दिया गया एक भाषण मध्यप्रदेश के भिंड में रहने वाले एक युवक के परेशानी का सबब बन गया है। दरअसल भिंड जिले के आलमपुर स्थित एसबीआई बैंक में अपनी गाढ़ी कमाई में जमा कर रहा था, लेकिन बैंक ने एक गलती कर दी। इस गलती की वजह से कोई दूसरा व्यक्ति उसके खाते से यह सोचकर पैसा निकालता रहा कि ये पैसा मोदी जी भेज रहे हैं।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल रूरई गांव के रहने वाले हुकुम सिंह और रोनी गांव के रहने वाले हुकुम सिंह, दोनों ने आलमपुर ब्रांच में अकाउंट ओपन करवाया। बैंककर्मी ने पासबुक में सिर्फ फ़ोटो अलग-अलग लगवाई बाकी दोनों का पता, और खाता नंबर एक ही दे दिया। यानी खाता एक और मालिक दो।

खाते से निकले करीब 90 हजार रुपए

अकाउंट ओपन करवाने के बाद रूरई गांव के रहने वाले हुकुम सिंह कुशवाहा रोज़ी कमाने हरियाणा चला गया। यहां से वो पाई-पाई जोड़कर वो खाते में जमा करवाता रहा, लेकि उधर रोनी गांव का रहने वाला हुकुम सिंह लगातार 6 महीने से बैंक पहुंचकर पैसे निकालता रहा। 6 महीने में हुकुम सिंह ने 89 हज़ार रुपए निकाल लिए।

कैसे हुआ मामला के खुलासा ?

इस पूरे मामले का तब हो पाया जब हुकुम सिंह को ज़मीन खरीदने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी। बीते 16 अक्टूबर को जब वह पैसे निकालने बैंक पहुंचा तो अकाउंट में पैसे देख वे चौंक गए। उनके खाते में महज 35 हजार 400 रुपए बचे, जबकि उनके मुताबिक वे अब तक 1 लाख 40 हजार रुपये जमा कर चुके थे।

कंप्लेन करने पर मामले को दबाने में जुटे बैंककर्मी

हुकुम सिंह कुश्वाहा ने जब इस मामले की कंप्लेन बैंक अधिकारियों से की तो वे इस मामले को दबाने में जुट गए। इसके बाद मामला जब बैंक मैनेजर तक पहुंचा तब जाकरी फरियादी हुकुम सिंह कुश्वाहा को यह भरोसा दिलाया गया कि उसके पैसे उसे मिल जाएंगे।

बैक अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि अकाउंट से निकला पैसा रोनी गांव के रहने वाले हुकुम सिंह के पास हैं। इस बाबत जब रोनी गांव के हुंकुम सिंह से सवाल जवाब किए गए तो उन्होंने साफ कहा कि, ''मेरा खाता था। उसमें पैसा आया। मैं सोच रहा था मोदीजी पैसा दे रहे हैं तो मैंने निकाल लिया। हमने घर में काम करवाया है और इसलिये पैसा हमें निकालना पड़ा।'' उन्होंने इस लापरवाही के लिए बैंक वालों को जिम्मेदार ठहराया है।