अब IRCTC चलाएगी ये लग्जरी ट्रेन, मिलेगा एसी सैलून, जिम, स्पा और बहुत कुछ

कान्सेप्ट फोटो  - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : कर्नाटक सरकार ने सैलानियों के लिये चलाई जा रही आलीशान गोल्डेन चैरिअट रेलगाड़ी की जिम्मेदारी राजस्व में हिस्सेदारी के एक समझौते के तहत भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को सौंप दी है।

इस समझौते पर मंगलवार को राजधानी में हस्ताक्षर किए गए और अब आईआरसीटीसी अपनी निगरानी में इस की आंतरिक साज-सज्जा बदल कर इसे मार्च 2020 से फिर परिचालित करेगी।

पिछले करीब 10 साल से इस ट्रेन को चला रहे कर्नाटक सरकार के उपक्रम कर्नाटक स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (केएसटीडीसी) को इसमें घाटा हो रहा था। उसने इसे पेशेवर तरीके से चलाने के लिए आईआरसीटीसी के साथ समझौता किया है।

भारतीय रेल के उपक्रम आईआरसीटीसी और केएसटीडीसी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के लिए यहां रेल भवन में आयोजित विशेष समारोह में रेल राज्य मंत्री सुरेश सी अंगड़ी ने कहा, ‘‘...हमें उम्मीद है कि आईआरसीटीसी लोगों को और बेहतर सेवा देगी जिससे न केवल दक्षिण में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार भी सृजित होंगे।''

उन्होंने इसका किराया प्रतिस्पर्धी रखने को भी कहा ताकि अधिक-से-अधिक लोग इसकी सेवा ले सकें। केएसटीडीसी के अधिकारियों के अनुसार 2008 में शुरू गोल्डेन चैरिअट के परिचालन में उन्हें कुल करीब 42 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

कर्नाटक के पर्यटन मंत्री सी टी रवि ने कहा, ‘‘इस कदम से दोनों संगठनों को लाभ होगा। कर्नाटक में हम्पी, पश्चिमी घाट जैसे कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जहां बड़े पैमाने पर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।''

उन्होंने उम्मीद जतायी कि इसमें रेलवे हर संभव समर्थन देगा। केएसटीडीसी के प्रबंध निदेशक कुमार पुष्कर ने बाद में ‘भाषा' से अलग से बातचीत में कहा, ‘‘हम इस ट्रेन को ‘नाइन्थ डायमेंसन होटल' के साथ चला रहे थे, लेकिन इसमें पिछले 10 साल में करीब हमें करीब 42 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसे और पेशेवर तरीके से चलाने के लिये हमने आईआरसीटीसी के साथ हाथ मिलाया है।''

उन्होंने समझौते के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘आईआरसीटीसी इसका विपणन, बिक्री और परिचालन करेगी और शुद्ध राजस्व में हमारी 1 प्रतिशत से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।'' एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस ट्रेन के परिचालन को लेकर निविदा भी जारी की थी, लेकिन कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली।''

अधिकारियों के अनुसार केएसटीडीसी जल्दी ही ट्रेन की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंप देगी। आईआरसीटीसी इसमें राज्य की खूबसूरती के अनुसार कुछ आंतरिक बदलाव लाकर मार्च 2020 से इसका परिचालन शुरू कर सकती है।

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उल्लेखनीय है कि आईआरसीटीसी के पास पर्यटन से जुड़े उत्पादों के परिचालन का अच्छा-खासा अनुभव है। कंपनी लोकप्रिय महाराजा एक्सप्रेस का भी परिचालन करती है। गोल्डेन चैरिअट 18 डिब्बों वाली लक्जरी ट्रेन है, जिसमें सैलानियों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।

इसमें 11 लग्जरी एसी सलून के साथ बार लाउंज, बिजनेस सेंटर, जिम और आयुर्वेदिक स्पा होंगे। कुल सात दिन की यात्रा के तहत यह ट्रेन बेंगलुरू से रवाना होगी और बंदीपुर टाइगर रिजर्व, मैसूर पैलेस, होलेश्वर मंदिर और चिकमंगलूर में काफी प्लांटेशन, हम्पी, बीजापुर में गोल गुम्बज और गोवा होते हुए सातवें दिन बेंगलुरू लौटेगी।

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