महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिरोध : क्यों लगा राष्ट्रपति शासन, यह हैं पांच प्रमुख आधार 

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी - Sakshi Samachar

मुंबई : महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसके बाद राष्ट्रपति ने भी इस सिफारिश पर मुहर लगा दी। वहीं, शिवसेना ने आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। कोश्यारी के कार्यालय द्वारा ट्वीट किये गये एक बयान के अनुसार, ‘‘वह संतुष्ट हैं कि सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, (और इसलिए) संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधान के अनुसार आज एक रिपोर्ट सौंपी गई है।'' अनुच्छेद 356 को जिसे आमतौर पर राष्ट्रपति शासन के रूप में जाना जाता है और यह ‘राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता' से संबंधित है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की जहां पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव के बाद कोई भी दल सरकार नहीं बना पाया।

कांग्रेस नेता मुंबई पहुंचे

एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बातचीत करने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल मुंबई पहुंचे।


सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई और प्रदेश में केंद्रीय शासन लगाने का राष्ट्रपति से अनुरोध करने का निर्णय किया गया। कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील रवाना हो गए।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवसेना

राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की खबर के बाद शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। दरअसल, आज शाम 8:30 बजे तक राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का दावा पेश करने का समय दिया था।

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उद्धव ठाकरे ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से इस बाबत संपर्क भी किया है। वहीं एनसीपी ने वैकल्पिक सरकार के गठन के वास्ते शरद पवार को अधिकृत कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि कांग्रेस के नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे, के सी वेणुगोपाल शाम पांच बजे शरद पवार से मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार गठन पर चर्चा के लिए पवार की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। एक सवाल के जवाब में नवाब मलिक ने कहा कि राजभवन की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन की सिफारिश या निर्णय नहीं लिया गया है।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करने के पीछे 5 आधार-


1. महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिरोध बरकरार है.
2. दावे के बावजूद शिवसेना समर्थन के पत्र नहीं दे सकी‬ तथा और अधिक समय मांगा.
3. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भी और समय मांगा‬.
4. विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लग रहे हैं.
5. कांग्रेस ऊहापोह की स्थिति में है.

वहीं, शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती दी है। शिवसेना ने कहा है कि उसने NCP और कांग्रेस से समर्थन पत्र हासिल करने के लिए तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल ने खारिज कर दिया। शिवसेना का कहना है कि राज्यपाल ने बीजेपी को यह बताने के लिए 48 घंटे का समय दिया कि क्या वह सरकार बना सकती है, लेकिन समर्थन पत्र हासिल करने के लिए शिवसेना को सिर्फ 24 घंटे का समय दिया।

शिवसेना ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के अवसर से इनकार करने के लिए बीजेपी के इशारे पर जल्दबाजी में काम किया।

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