आर.के. माथुर ने ली लद्दाख के उपराज्यपाल पद की शपथ

राधा कृष्ण माथुर ने  लद्दाख के पहले उप राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। - Sakshi Samachar

लेह : राधा कृष्ण माथुर ने गुरुवार सुबह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पहले उप राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह तिसूरू लेह स्थित सिंधु संस्कृति ऑडिटोरियम में सुबह 7.30 बजे हुआ।

जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने एक सादा समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई।


माथुर त्रिपुरा से 1977 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने बाद में स्थानीय पुलिस के गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। उन्होंने आईआईटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर किया है। वह वर्ष 2015 में रक्षा सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उसी वर्ष दिसंबर में उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया। पिछले वर्ष 65 वर्ष की आयु होने के साथ ही नवंबर में उनका कार्यकाल भी पूरा हो गया। शपथ ग्रहण से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर माह से अविभाजित जम्मू कश्मीर में लगा राष्ट्रपति शासन हटा दिया था।

लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आने से एक दिन पहले बुधवार को केंद्र ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उमंग नरूला को इस हिमालयी क्षेत्र के नव नियुक्त उप राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया। नरूला 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

इसी के साथ ही, 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एस एस खंडारे को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का ‘‘पुलिस प्रमुख'' नियुक्त किया गया है। लगभग तीन लाख की आबादी वाले लद्दाख की सीमाएं पाकिस्तान और चीन से लगती हैं। इस लिहाज से यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 'जम्मू एवं कश्मीर' के केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के रूप में पुनर्गठन पर एक अधिसूचना जारी की है।

राज्य अब से दो केंद्रीय शासित प्रदेशों- एक, विधानसभा वाला जम्मू एवं कश्मीर वहीं दूसरा बिना विधानसभा वाले लद्दाख के रूप में अस्तित्व में है।

इसमें कहा गया कि 'जम्मू एवं कश्मीर सरकार' को अब 'केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर सरकार' और 'केंद्र शासित लद्दाख प्रशासन' माना जाएगा।

तीस अक्टूबर को जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया कि वहां बने कुछ केंद्रीय कानून और नियम, जो कि अखंड जम्मू एवं कश्मीर पर लागू हैं, दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगे।

गृह मंत्रालय ने कहा कि राज्य विधान परिषद सहित राज्य विधानमंडल को समाप्त कर दिया गया है और अब से इसे 'केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर की विधानसभा' के रूप में जाना जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि समय-समय पर संशोधित किए गए संविधान के सभी प्रावधान मौजूदा जम्मू एवं कश्मीर में पांच अगस्त 2019 से लागू हो गए हैं।

मंत्रालय ने आगे कहा कि पांच अगस्त 2019 से 31 अक्टूबर के बीच किए गए किसी भी अधिसूचना या आदेश, नियम या नियुक्ति को 'संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसा कानून के अनुसार किया गया है।

आपको बता दें कि आज से देश में राज्यों की संख्या 28 रह गई और केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या बढ़कर नौ हो गई। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के संविधान और रणबीर दंड संहिता का बृहस्पतिवार से अस्तित्व खत्म हो जाएगा जब राष्ट्र पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाने के लिए ‘राष्ट्रीय एकता दिवस' मनाएगा।

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