नई दिल्ली : देश की सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और जाने-माने अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है हर बात पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आलोचना ठीक बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भाजपा को इसके बजाय नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह द्वारा अमल में लाए गए आर्थिक मॉडल और नीतियों को अपनाना चाहिए।

एक अंग्रेजी अखबर में लेख लिखकर परकला प्रभाकर ने कहा कि मौजूदा सरकार को पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की नीतियों से सीखना चाहिए। परकला प्रभाकर ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की भी आलोचना की है।

उन्होंने लिखा है कि सत्ताधारी पार्टी नेहरूवादी आर्थिक ढांचे की आलोचना करती रही है, लेकिन वह इसका विकल्प नहीं पेश कर पाई है। परकला प्रभाकर ने अपने लेख में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। सरकार भले ही इससे इनकार करे, लेकिन जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनसे यह पता चलता है कि एक-एक कर कई सेक्टर संकट के दौर का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा, “नेहरूवादी आर्थिक ढांचे पर जुबानी हमले महज राजनीतिक वार हैं, पर इनसे कभी भी अर्थव्यवस्था संबंधी समस्याएं नहीं सुलझेंगी। भाजपा के थिंक टैंक (बुद्धिजीवी नेता) को यह बात समझ में नहीं आई है।”

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प्रभाकर ने यह भी सुझाया कि भाजपा के राजनीतिक प्रोजेक्ट में सरदार वल्लभ भाई पटेल जब आदर्श बन सकते हैं, तब राव भी पार्टी के आर्थिक ढांचे के लिए ‘मजबूत चेहरा’ बन सकते हैं।

पति के बयान पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रतिक्रिया दी है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 से 2019 के बीच मूलभूत सुधार हुए हैं। जीएसटी कांग्रेस के जमाने में नहीं हो पाया। आईबीसी और आधार को सार्वभौमिक बनाया गया। उज्ज्वला से आठ करोड़ महिलाओं को फायदा हुआ। इस साल बजट के बाद टैक्स रिफॉर्म किया गया। एक अक्टूबर के बाद अगर आप बिजनेस लगाते हैं तो आपको दुनिया में सबसे कम टैक्स देना होगा। ये सब पब्लिक डोमेन में है। इसकी सराहना करना भी अच्छा होगा।