सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की मांग, हमें 5 दिसंबर 1992 जैसा अयोध्या चाहिए 

फाइल फोटो  - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के आखिरी दौर की सुनवाई चल रही है। अदालत में मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने सोमवार को अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने अपनी दलीलें रखते वक्त कहा कि हमें (मुस्लिम पक्ष) 5 दिसंबर 1992 जैसा अयोध्या चाहिए, जो बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले का था। हम हमेशा ये नहीं सोच सकते हैं कि 1992 नहीं हुआ।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील रखे जाने का आज आखिरी दिन है। इस मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर को खत्म होनी है। 15-16 अक्टूबर को हिंदू पक्ष को अपने तर्क रखने हैं।

गौरतलब है कि सोमवार को जब अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू हुई तो राजीव धवन ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील रखीं। राजीव धवन ने अदालत में कहा कि श्रद्धा से जमीन नहीं मिलती है, स्कन्द पुराण से अयोध्या की जमीन का हक नहीं मिलता है। हिंदू पक्ष लगातार अदालत में श्रद्धा और पुराणों का जिक्र कर रहा है।

इसे भी पढ़ें :

अयोध्या केस: मुस्लिम पक्ष का यू-टर्न, बोला- राम चबूतरे को कभी नहीं माना जन्मस्थान

अयोध्या विवाद : 18 अक्टूबर तक बहस पूरी होने की उम्मीद, फैसले के लिए लगेंगे 4 हफ्ते

राजीव धवन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कई सवाल खड़े किए गए, उन्होंने कोर्ट में कहा कि आप हमेशा हमसे (मुस्लिम पक्ष) से सवाल करते हैं, जबकि उनसे (हिंदू पक्ष) से सवाल नहीं पूछे जा रहे हैं। हालांकि, अदालत की ओर से किसी तरह की टिप्पणी नहीं की गई।

6 दिसंबर 1992 को क्या हुआ था

’90 के दशक की शुरुआत में जब भाजपा ने राममंदिर रथयात्रा निकाली तो देश में राजनीति गर्मा गई थी। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में भारी सुरक्षा के बीच भाजपा नेताओं की अगुवाई में भारी भीड़ बाबरी मस्जिद के ढांचे की तरफ बढ़ रही थी, हालांकि पहली कोशिश में पुलिस इन्हें रोकने में कामयाब रही थी, लेकिन बाद में ढांचे को गिरा दिया गया।

Advertisement
Back to Top