नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दो बड़े फैसले किए है। इसमें से पहला फैसला देश के 11 लाख रेलवे कर्मचारियों को लेकर किया गया है। दरअसल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 लाख से अधिक भारतीय रेल कर्मचारियों के लिए 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस को स्वीकृति दी है।

रेलवे पर पड़ेगा 2,024 करोड़ का भार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रिमंडल के फैसलों से मीडिया को अवगत कराते हुए कहा, "यह कर्मचारियों का हौसला बढ़ाएगा। यह उनकी उत्पादकता का पुरस्कार है।" रेलवे कर्मचारियों को बोनस देने से भारतीय रेल पर 2,024 करोड़ का भार पड़ेगा।

जावड़ेकर ने कहा कि 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस देने का मंत्रिमंडल का निर्णय लगातार छठी बार लिया गया है जोकि एक रिकार्ड है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बोनस कर्मचारियों की उत्पादकता से जुड़ा हुआ है और इसके तहत 11.52 लाख योग्य अराजपत्रित(नन-गैजेटेड) रेलवे कर्मचारी कवर होंगे।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, "सभी अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को उत्पादकता से जुड़ा बोनस(पीएलबी) दिया जाना रेलवे को दक्षतापूर्वक चलाने में उनके योगदान की पुष्टि है।" रेलवे सुरक्षा बल(आरपीएफ) और रेलवे सुरक्षा विशेष बल(आरपीएसएफ) कर्मी को बोनस का लाभ नहीं मिलेगा।

देश में ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध

देश में ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके तहत ई-सिगरेट निर्माण, आयात, निर्यात, वितरण और भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मंत्रिमंडलीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रतिबंध को लागू करने के लिए सरकार तत्काल एक अध्यादेश लाएगी, जिसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र में एक विधेयक संसद में पेश करेगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव प्रीति सुदान ने कहा कि प्रतिबंध के तहत, पहली बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना या एक साल की जेल की सजा का प्रावधान होगा। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर तीन साल की जेल या पांच लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि आयात, निर्यात और वितरण, ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पादों का भंडारण करना संगीन अपराध माना जाएगा।

यह निर्णय विभिन्न धड़ों द्वारा इलेक्ट्रोनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) पर प्रतिबंध की मांग किए जाने के बाद लिया गया है। ईएनडीएस में ई-सिगरेट्स, हीट-नॉट-बर्न डिवाइसेज, वेप, ई-शीशा, ई-निकोटीन फ्लेवर्ड हुक्का और ऐसी ही अन्य डिवाइसें आती हैं।

ई-सिगरेट्स में तंबाकू नहीं जलती है, लेकिन तरल रसायन गर्म होता है जो भाप बनकर व्यक्ति के शरीर में जाता है। इस कारण इसे वेपिंग भी कहा जाता है। ई-सिगरेट्स स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी गया है।

सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में हालांकि भारत की कोई कंपनी ई-सिगरेट नहीं बनाती है, लेकिन यहां लगभग 400 ब्रांड 150 फ्लेवर्स में ई-सिगरेट उपलब्ध कराते हैं।