नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के खिलाफ दो अक्टूबर से एक ‘‘नया जन-आंदोलन'' शुरू करने का रविवार को आह्वान किया। मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक संबोधन ‘मन की बात' में कहा कि जब देश राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती मना रहा है, तब ऐसे में ‘‘ हम प्लास्टिक के खिलाफ एक नया जन-आंदोलन आरंभ करेंगे।''

उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रह एवं भंडारण और निपटारे के प्रयासों का आह्वान किया। मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी अपने संबोधन में नागरिकों से अपील की थी कि वे एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का प्रयोग बंद करें।

उन्होंने सुझाव दिया था कि दुकानदार उपभोक्ताओं को पर्यावरण के अनुकूल थैले मुहैया कराएं। उन्होंने ‘मन की बात' में भी एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करने की अपील की जिसे पर्यावरण संरक्षण के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

खुले में शौच मुक्त होगा भारत

पीएम ने कहा कि इस बार 2 अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनायेंगे तो इस अवसर पर हम उन्हें न केवल खुले में शौच से मुक्त भारत समर्पित करेंगे बल्कि उस दिन पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन-आंदोलन की नींव रखेंगे। कई व्यापारी भाइयों-बहनों ने दुकान में एक तख्ती लगा दी है, जिस पर यह लिखा है कि ग्राहक अपना थैला साथ ले करके ही आयें। इससे पैसा भी बचेगा और पर्यावरण की रक्षा में वे अपना योगदान भी दे पायेंगे।

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उन्होंने कहा कि गांधी जी ने किसानों की सेवा की जिनके साथ चम्पारण में भेद-भाव हो रहा था। उन मिल मजदूरों की सेवा की जिन्हें उचित मजदूरी नहीं मिल रही थी, गांधी जी ने गरीब, बेसहारा और कमजोर लोगों की सेवा को अपने जीवन का परम कर्तव्य माना। गांधी जी ने सेवा शब्दों में नहीं, जी करके सिखायी थी। सत्य के साथ, गांधी जी का जितना अटूट नाता रहा है, सेवा के साथ भी उतना ही अनन्य अटूट नाता रहा है।

महात्मा गाँधी, अनगिनत भारतीयों की तो आवाज बने ही, लेकिन, मानव मूल्य और मानव गरिमा के लिए, एक प्रकार से, वे, विश्व की आवाज बन गये थे। पीएम मोदी ने कहा कि ये मेरा बहुत ही सौभाग्य रहा है, कि मुझे, पूज्य महात्मा गांधी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जगहों पर जाकर के नमन करने का अवसर मिला है।

वेनिस बायनेले नाम का एक प्रसिद्ध ऑर्ट शो है। जहाँ दुनिया भर के कलाकार जुटते हैं। इस बार वेनिस बायनेले के इंडिया पवेलियन में गांधी जी की यादों से जुड़ी प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें हरिपुरा पैनल्स विशेष रूप से दिलचस्प थे। सत्य के साथ गांधीजी का जितना अटूट नाता रहा है, सेवा के साथ भी गाँधी का उतना ही अनन्य अटूट नाता रहा है। उन्होंने ना केवल सेवा पर बल दिया बल्कि उसके साथ जुड़े आत्म-सुख पर भी जोर दिया।