नई दिल्ली : उन्नाव रेप पीड़िता से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले दिए हैं। पीड़िता को इलाज के लिए अब दिल्ली नहीं लाया जाएगा। उसका इलाज लखनऊ में ही जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की अलग बेंच मामले की आगे सुनवाई करेगी।

बताया जा रहा है कि कोर्ट ने पीड़िता के परिजनों पर यह फैसला छोड़ दिया है कि उन्हें इलाज लखनऊ में ही कराना है या दिल्ली में। कोर्ट ने कहा कि परिवार उसे लखनऊ के अस्पताल से एम्स स्थानांतरित करने पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है।

दूसरी तरफ पीड़िता के चाचा को उत्तर प्रदेश की रायबरेली जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि यूपी सरकार ने दावा किया कि पीड़िता के चाचा रायबरेली जेल में सुरक्षित हैं। कोर्ट ने पीड़िता की चाचा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला दिया है।

पीड़िता की हालत नाजुक

पीड़िता का मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए बताया गया कि उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

पीड़िता और उनके वकील की हालत स्थिर बनी हुई है। पीड़िता जहां अब भी वेंटीलेटर पर है, वहीं वकील को भी कुछ देर के लिये वेंटीलेटर से हटाकर देखा गया। केजीएमयू ने ऐसी किसी संभावना से इनकार किया कि पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया जा रहा है।

केजीएमयू ट्रामा सेंटर के प्रभारी डॉक्टर संदीप तिवारी ने कहा, ''पीड़िता को कई फ्रैक्चर हैं। साथ ही सीने में भी चोट है। पीड़िता की हालत स्थिर है। बहुत मामूली सुधार हुआ है लेकिन अभी इसे संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। पीड़िता को अभी तक होश नहीं आया है।''

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उन्होंने बताया कि पीड़िता का सीटी स्कैन कराया गया था लेकिन सिर में कोई चोट फिलहाल नजर नहीं आयी है। इसके बावजूद सिर की चोट से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि सिर की बहुत सी चोटें सीटी स्कैन में नजर नहीं आती हैं। पीड़िता की हालत स्थिर है और डाक्टरों की टीम 24 घंटे उसकी निगरानी कर रही है और वह अब भी वेंटीलेटर पर है।

उन्होंने बताया कि घायल वकील महेंद्र सिंह को कुछ देर के लिये वेंटीलेटर से हटाकर देखा गया था। इस दौरान उनकी तबीयत स्थिर रही। बाद में फिर उन्हें वेंटीलेटर पर कर दिया गया।