नई दिल्ली। उन्नाव रेप मामले में रेप विक्टिम द्वारा 12 जुलाई को लिखी चिट्ठी में सुप्रीम कोर्ट में अपना फैसला सुना दिया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई वाली तीन जजों की बेंच ने की। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्नाव कांड से जुड़े सभी 5 केस दिल्ली में ट्रांसफर किया जाय। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इसके साथ ही केन्द्रीय जांच ब्यूरो को ट्रक और रेप पीड़ित की कार में हुई टक्कर की घटना की जांच सात दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने किया स्पेशल जज को अप्वाइंट

कोर्ट ने इसके लिए उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता से संबंधित पांच मामलों में प्रतिदिन सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया है। इस दुर्घटना में बलात्कार पीड़ित के परिवार के दो सदस्यों की मृत्यु हो गयी थी और पीड़ित तथा उसका वकील बुरी तरह जख्मी हो गये थे।

45 दिन में पूरी हो उन्नाव मामले की सुनवाई : कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार और दुर्घटना मामले में अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट को दिन-प्रतिदिन के मामलों की सुनवाई करनी चाहिए और 45 दिनों के भीतर इसे पूरा करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने चार मामलों में सुनवाई भी की, जिसमें 28 जुलाई की दुर्घटना और गैंगरेप का मामला शामिल है, कोर्ट ने कहा है कि इन सभी मामलों को 45 दिनों के भीतर समाप्त किया जाना चाहिए।।

पीड़िता को शुक्रवार तक राज्य सरकार दे 25 लाख का मुआवजा

सीजेआई ने भाजपा शासित राज्य में कानून और व्यवस्था की खराब स्थिति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की निंदा भी की। सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नाराजगी जताई और कहा, ‘‘इस देश में आखिर हो क्या रहा है? कुछ भी कानून के हिसाब से नहीं हो रहा।’’ कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए शुक्रवार तक पीड़िता को 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने को कहा है।

15 दिन से आगे नहीं बढ़नी चाहिए एक्सीडेंट की जांच

सीजेआई रंजन गोगोई ने उन्नाव रेप की पीड़िता के एक्सीडेंट मामले में सीबीआई को अपनी जांच समाप्त करने के लिए सात दिनों का समय निर्धारित किया। कोर्ट ने सीबीई को हिदायत देते हुए कहा कि हो सकता है जांच में एक हफ्ते की बजाय दो हफ्ते लग जाय, लेकिन किसी भी सूरत में एक पखवाड़े से ज्यादा यह जांच आगे नहीं बढ़नी चाहिए।

CRPF को दिया सुरक्षा का जिम्मा

सुप्रीम कोर्ट ने राय बरेली स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कमांडमेंट को आदेश दिया है कि वह पीड़िता के परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके आदमियों से खतरा है।

परिवार की सहमति के बाद ही देंगे विक्टिम और वकील को एयरलिफ्ट किए जाने का आदेश

शीर्ष अदालत ने जांच ब्यूरो को लखनऊ स्थित केजी मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टरों से मौखिक रूप से मिले निर्देश का संज्ञान लिया कि दोनों घायल-पीड़ित और वकील-विमान से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान ले जाने की स्थिति में हैं। न्यायालय ने कहा कि इस बारे में घायलों के परिवार के सदस्यों से हिदायत मिलने के बाद ही कोई आदेश दिया जायेगा।

DCW के निशाने पर सीएम योगी

वहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ दिल्ली महिला आयोग के निशाने पर आ गए। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालिवाल ट्वीट कर कहा कि UP CM आदित्यनाथ को शर्म आनी चाहिए। पहले दिन से हम चीख़ रहे हैं लड़की को मुआवज़ा दिलाओ पर इनकी अकड़ इतनी है की आँख मूँद के बैठे रहे। अब SC से फटकार पड़ी तब क्या इज़्ज़त रह गयी। SC ने लड़की को हक़ दिलाया। इस 25 लाख की अंतरिम राहत से उसके घाव नही भर सकते पर मदद बहुत होगी।

स्वाती मालिवाल ने सीजेआई के फैसले का किया धन्यवाद

दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन स्वाती मालिवाल ने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि देश के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षर में लिखा जाएगा। उन्नाव रेप पीडिता के केस में CBI को जाँच 7 दिन में पूरी करनी होगी और डेली हीरिंग करके 45 दिन में पूरा केस ख़त्म किया जाएगा। अब कुलदीप सैंगर को फाँसी दूर नही। दिल से धन्यवाद रंजन गोगोई जी का।

धमकियां मिलने पर रेप विक्टिम ने 12 जुलाई को लिखा था चीफ जस्टिस को पत्र

12 जुलाई को चीफ जस्टिस गोगोई को लिखे गए पत्र में पीड़िता और उसकी मां ने सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसमें लिखा था- उन लोगों पर एक्शन लिया जाए, जो उसे धमकाते हैं। लोग घर आकर केस वापस लेने की धमकी देते हैं। कहते हैं कि अगर ऐसा नहीं किया तो झूठे केस में फंसाकर जिंदगीभर जेल में बंद करवा देंगे। हालांकि, यह चिट्ठी चीफ जस्टिस की जानकारी में नहीं लाई गई।

बुधवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सेक्रेटरी जनरल से इस बारे में सवाल किए। सेक्रेटरी जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में हर महीने औसतन 5 हजार पत्र आते हैं। रजिस्ट्री को जुलाई में 6,900 लेटर मिले हैं। इनमें से 1,100 पत्र याचिकाएं थीं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक इनकी स्क्रीनिंग की गई थी। इस मामले में रजिस्ट्री को पीड़िता के नाम तक की जानकारी नहीं मिली।