सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र हत्याकांड के हफ्ते भर बीत जाने के बाद कई वीडियो सामने आए हैं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नरसंहार वाले दिन कैसे आदिवासी किसानों पर हमला कर ताबड़तोड़ फ़ायरिंग कर उन गरीब और मजलूम किसानों की सांसों की डोर रोक दी गई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में से एक वीडियो में इस नरसंहार की शुरूआत कैसे हुई यह साफ- साफ देखा जा सकता है। वीडियो मं साफ दिख रहा है कि गांव के प्रधान गरीब आदिवासी किसानों पर कैसे फायरिंग की थी। वीडियो में यह भी दिख रहा है कि भारी तादाद में लोग लाठी-डंडों से गांववालों को पीट रहे हैं। यहां तक कि गोली लगने से गिरे घायल लोगों को भी बेदर्दी से पीटा जा रहा है। चारों तरफ चीख़ने चिल्लाने की आवाज आ रही है। गांव वालों खौफ में हैं।

वही एक दूसरे वीडियो में दिख रहा है कि आरोपियों के फ़रार होने के बाद घटनास्‍थल पर ज़मीन पर पड़े घायल लोगों के साथ ही ख़ून से सनी लाशें भी पड़ी हैं। इन वीडियो को घटना के वक्‍़त स्‍थानीय लोगों ने बनाया था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के घोरावल थाना क्षेत्र के उम्भा गाँव का है। गाँव में ज़मीन को लेकर हुए विवाद में 17 जुलाई को क़रीब 10 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमे कई अन्य लोग घायल हुए हैं। किसानों ने 36 एकड़ ज़मीन देने से इनकार कर दिया था, जिस पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे थे। इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।कई अन्‍य लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है।

नरसंहार के बाद गांव के प्रधान यज्ञ दत्त पर आरोप लगा है कि उसने फ़ायरिंग का नेतृत्व किया था और वह करीब 32 ट्रैक्टरों में भर कर हथियारों से लैस क़रीब 200 लोगों को लेकर आया था। यज्ञ दत्त का दावा है कि उसने दस साल पहले स्थानीय परिवार से यह ज़मीन ख़रीदी थी

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क्या है विवाद के पीछे की कहानी

बता दें कि इस ख़ूनी संघर्ष में के एक पूर्व आईएएस अधिकारी प्रभात कुमार मिश्रा का नाम सामने आ रहा है। आईएएस ने यहाँ आदिवासियों के कब्ज़े में रही 90 बीघा ज़मीन को को-ऑपरेटिव सोसाइटी के नाम करा लिया था। उस समय तहसीलदार के पास नामांतरण का अधिकार नहीं था, लिहाज़ा नाम नहीं चढ़ सका। इसके बाद सात सितंबर 1989 को आईएएस ने अपनी पत्नी व बेटी के नाम ज़मीन करवा ली।

आईएएस की बेटी इस ज़मीन पर हर्बल खेती करवाना चाहती थी। लेकिन ज़मीन पर कब्ज़ा न मिलने की वजह से उसका प्लान फ़ेल हो गया। नियम है कि सोसाइटी की ज़मीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं हो सकती। इसके बाद आईएएस ने विवादित ज़मीन में से काफ़ी बीघा ज़मीन प्रधान यज्ञदत्त सिंह भूरिया को औने-पौने दाम पर बेच दी। हालाँकि ज़मीन पर आदिवासियों का कब्ज़ा आज भी बरकरार रहा।