कानपुर। उत्तर प्रदेश में एक यूनिवर्सिटी पिछले एक महीने से काफी चर्चा में है। यूनिवर्सिटी का नाम है हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी और यह कानपुर में है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर मामला क्या है? दरअसल यह मामला यह है कि एक अफसर के खाते में आने वाले 6 लाख 38 हजार रुपए उसके हमनाम एक फोर्थग्रेड कर्मचारी के खाते में चले गए। खाते में पैसे आते ही कर्मचारी ने लौटाने से इंकार कर दिया है। उसका कहना है कि मोदी जी ने उसके खाते में पहली किस्त भेजी है।

रकम वापस ना करने की वजह से विश्व विद्यालय प्रशासन ने उस कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। इस मामले में प्रोफेसर डीएल परमार की अगुवाई में एक कमेटी को जांच के आदेश दिये हैं। ये कमेटी 15 दिन मे अपनी रिपोर्ट देगी।

क्लरिकल मिस्टेक की वजह से पैसे हुए ट्रांसफख

विवि के परीक्षा नियंत्रक और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. प्रदीप कुमार का कंसलटेंसी का करीब 6 लाख 38 हजार रुपये विश्वविद्यालय पर बकाया था। ये राशि उनके खाते में जानी थी, लेकिन लिपिकीय गलती की वजह से 6 लाख 38 हजार रुपये प्रोफेसर प्रदीप कुमार के बजाय इसी कॉलेज के फोर्थग्रेड कर्मचारी प्रदीप कुमार के खाते में ट्रांसफर हो गए।

लौटाने से इंकार करने पर हुआ सस्पेंड

मामले की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारी से पैसे वापस की बात कही। विवि के रजिस्ट्रार प्रो. मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि कर्मचारी ने लिखित रूप में बताया है कि वो इस राशि को वापस नहीं करेगा। ये मोदी जी ने उसे पहली किश्त के रूप में भेजा है। बताया गया है कि रकम ट्रांसफर होने के दूसरे दिन ही कर्मचारी प्रदीप कुमार ने साढ़े चार लाख रुपये खाते से निकाल कर खर्च भी कर दिए।

कर्मचारी के जवाब से विभाग हैरान

कर्मचारी के इस जवाब से सभी हैरान और परेशान है। जब अधिकारियों के अधिक दवाब पड़ने के बाद भी कर्मचारी ने रुपये वापस करने से मना कर दिया। और साथ में कहा कि अगर जरूरत है तो हर माह दो दो हजार रुपये करके वह पैसे वापस कर सकता है। रजिस्ट्रार का कहना है कि कई बार पत्र लिखने के बाद भी प्रदीप कुमार ने ये पैसे वापस नहीं किए. जिसके चलते उनका बैंक खाता सीज कर उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।