नई दिल्ली: शीला दीक्षित कांग्रेस पार्टी का एक ऐसा नाम है, जिन की उपलब्धियों की चर्चा अक्सर कांग्रेस पार्टी अपने विकास की योजनाओं को गिनाते हुए किया करती है। आज शीला दीक्षित का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शीला दीक्षित को नेहरू गांधी परिवार का काफी करीबी सदस्य माना जाता था। पंजाब से ताल्लुक रखने वाली शीला दीक्षित उत्तर प्रदेश और दिल्ली कि राजनीति में गहरी पकड़ थी।

आपको बता दें कि दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी शीला दीक्षित गांधी परिवार के काफी करीबी मानी जाती थीं। उन्होंने अपनी शादी के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित से संभालना सीखा था। उसके बाद से ही इन का पद व कद पार्टी में बढ़ता ही गया।

शादी के पहले शीला दीक्षित पहले शीला कपूर के नाम से जानी जाती थी। इन्होंने मिरांडा हाउस में पढ़ाई के दौरान जब अपने मित्र विनोद कुमार दीक्षित से शादी करने का फैसला किया था। उनके पति विनोद कुमार दीक्षित एक आईएएस अधिकारी थे विनोद कुमार दिक्षित कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमाशंकर दीक्षित के पुत्र थे। उमाशंकर दीक्षित कांग्रेस पार्टी की राजनीति में काफी कद्दावर नेता माने जाते थे।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ शीला दीक्षित फाइल फोटो
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ शीला दीक्षित फाइल फोटो

आपको बता दें कि जब 1969 में इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी से निकाला गया था, तो उनका साथ देने वाले चंद नेताओं में उमाशंकर दीक्षित भी शामिल थे। इसीलिए जब इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई तो उमाशंकर दीक्षित को उनकी वफादारी का इनाम देते हुए 1974 में उन्हें देश का गृह मंत्री बनाया गया।

1980 में एक रेल यात्रा के दौरान उनके पति विनोद कुमार दीक्षित की मौत हो गई । उसके बाद उन्होंने अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को संभालने का जिम्मा उठाया। 1984 के आम चुनाव में शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश की ब्राह्मण बाहुल्य सीट कन्नौज से टिकट मिला और वह सीट जीतकर पहली बार लोकसभा में पहुंची। 1984 में राजीव गांधी कब प्रधानमंत्री बने तो शीला दीक्षित को राज्यमंत्री भी बनाया गया।

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1991 में ससुर उमाशंकर दीक्षित के देहांत के बाद शीला दीक्षित पूरी तरह से दिल्ली में आकर बस गईं। उन्होंने 1998 में दिल्ली पूर्वी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। इसके बाद उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा और गोल मार्केट से विधायक बनकर दिल्ली विधानसभा में पहुंची। इसके बाद तो हर कोई शीला दीक्षित के काम व प्रशासनिक स्टाइल का कायल हो गया और वह लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री चुनी गईं।