बिहार में बाढ़ का कहर जारी, आई रुला देने वाली ये तस्वीर

बिहार में बाढ़ से बच्चे की मौत  - Sakshi Samachar

मुज़फ्फरपुर : बिहार में पिछले कुछ समय से बाढ़ का कहर जारी है। कई नदियां उफान पर हैं। इस दौरान मुज़फ्फरपुर के शिवाईपट्टी थाना के शीतलपट्टी गांव से एक बच्चे की तस्वीर सामने आई है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बच्चे की नदी में डूबने से मौत हो गई है। नदी में डूबे अर्जुन नाम के बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

बताया जा रहा है कि शीतलपट्टी के मीनापुर के शीतलपुर निवासी शत्रुघ्न राम की पत्नी रीना देवी बागमती नदी के तट पर कपड़ा धोने और नहाने गई थी। उसके साथ उनके 4 बच्चे भी गए थे जो नदी के किनारे खेल रहे थे। तभी अचानक उनका 1 बच्चा पानी में फिसल गया।


बच्चे को बचाने पानी में कूद गई मां और भाई

बच्चे को बचाने के लिए मां और बाकी तीनों बच्चे भी पानी में कूद पड़े लेकिन तेज बहाव में वे सब डूबने लगे। स्थानीय लोगों ने उन्हें समय रहते देख लिया जिससे रीना देवी और उनकी एक बेटी राधा को लोगों ने बचा लिया, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी जीन बच्चे अर्जुन, राजा और बेटी ज्योति को बाहर नहीं निकाला जा सका।

बड़ी मुशक्कत के बाद किसी तरह तीनों बच्चों के शव को पानी से निकाला जा सका। इनमें से एक बच्चे की तस्वीर सामने आई है, उसका नाम अर्जुन है। अर्जुन की उम्र महज 3 महीने बताई जा रही है।

सीरिया का 3 साल का बच्चा

सीरिया का 3 साल का बच्चा

एक ऐसा ही मंजर 2015 में देखने को मिली थी। जब तुर्की के समुद्री तट पर 1 सीरियाई बच्चे की तस्वीर सामने आई थी। यह तस्वीर सबको झकझोर कर रख देने वाली थी। एलन कुर्दी नाम के 3 साल के इस बच्चे का शव तुर्की के समुद्री तट पर बहकर आया था।

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पिता और बेटी की तस्वीर 

पिता-पुत्री का शव

हाल ही में नॉर्थ अमेरिका की सीमा से लगी रियो ग्रांडे नदी के किनारे एक पिता और बेटी की लाश की भी तस्वीर सामने आई थी। तस्वीर में 2 साल की बच्ची का सिर उसके पिता की टीशर्ट के अंदर है। इससे जाहिर होता है कि जिंदगी के आखिरी पलों में पिता-पुत्री एक-दूसरे को गले लगाए हुए थे।

गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में बहने वाली बागमती, लखनदेई और बूढ़ी गंडक नदी में इस साल भी उफान आने से लोगों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। गांव के गांव पानी में डूबे हैं। अपनी जान बचाने के लिए लोग गांव, घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी मुसीबतें यहां भी कम नहीं हो रही हैं।

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