नयी दिल्ली : गृह मंत्रालय की परियोजना 'स्वचालित चेहरा पहचान प्रणाली' (एएफआरएस) अगले साल शुरू हो जाएगी। यह सॉफ्टवेयर अपराधियों और लापता लोगों की पहचान करने के साथ-साथ लावारिश शवों की वैज्ञानिक एवं तेजी से पहचान करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करेगा। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। एफआरएस का क्रियान्वयन राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा किया जा रहा है।

यह 'क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम' (सीसीटीएनएस) का एक हिस्सा है, जो अपराध एवं अपराधियों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'इस सॉफ्टवेयर (एएफआरएस) का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे लोगों के मामलों में किया जाएगा, जो सीसीटीएनएस डेटाबेस में शामिल किए गए हैं-- आरोपी व्यक्ति, कैदी, लापता व्यक्ति और बच्चों, लावारिश शवों।

इसका इस्तेमाल किसी अन्य डेटाबेस पर नहीं किया जाएगा। पुलिस जांच में अंगुलियों के निशान का मिलान करती है। लेकिन एएफआरएस के तहत जांच में एक और चरण जुड़ जाएगा, जिसके तहत संदिग्ध या लापता व्यक्ति की तस्वीरों का मिलान सीसीटीएनएस के डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से किया जाएगा।

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अधिकारी ने कहा कि डेटाबेस तक पहुंच सिर्फ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की होगी और उसका पूरा संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस अभी सीसीटीएनएस डेटाबेस से तस्वीरों का मिलान ''मैनुअल सर्च'' के जरिए करती है। लेकिन एएफआरएस का इस्तेमाल शुरू हो जाने पर इलेक्ट्रानिक सर्च संभव हो जाएगा।